520 गीगावॉट पार कर भारत की बिजली क्षमता, गैर-जीवाश्म स्रोतों का बढ़ा दबदबा
भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 520 गीगावॉट से अधिक हो गई है, जिसमें आधे से अधिक उत्पादन गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हो रहा है। यह जानकारी ऊर्जा संक्रमण शिखर सम्मेलन 2026 में केंद्रीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येस्सो नाइक ने दी। नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा किया गया। मंत्री ने कहा कि भारत का ऊर्जा संक्रमण अब लक्ष्य मात्र नहीं, बल्कि एक सक्रिय और संरचित प्रक्रिया बन चुका है, जिसे स्पष्ट नीतियों और सतत निवेश का समर्थन प्राप्त है।
नवीकरणीय ऊर्जा में तेज वृद्धि
हाल के वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में तीन गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि नवीकरणीय ऊर्जा अब राष्ट्रीय विद्युत मिश्रण का मुख्य हिस्सा बनती जा रही है। प्रतिस्पर्धी बोली प्रणाली और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसे सरकारी प्रयासों ने नवीकरणीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति दी है।
अल्ट्रा-मेगा नवीकरणीय ऊर्जा पार्कों की स्थापना तथा पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देकर विकेन्द्रीकृत ऊर्जा उत्पादन और उपभोक्ता भागीदारी को मजबूत किया गया है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच बढ़ी है।
2030 तक 500 गीगावॉट का लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही, देश ने 2070 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन हासिल करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की है।
स्वच्छ ऊर्जा की ओर यह परिवर्तन वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है, साथ ही घरेलू ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता को भी पूरा करता है। बढ़ती ऊर्जा मांग को संतुलित करते हुए पर्यावरणीय संरक्षण सुनिश्चित करना इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य है।
आर्थिक और सामरिक लाभ
ऊर्जा संक्रमण केवल उत्सर्जन में कमी तक सीमित नहीं है। यह औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, रोजगार सृजन और जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने में भी सहायक है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार से ग्रिड की लचीलापन क्षमता बढ़ती है और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है। इससे भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा बाजार में भी एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का संकल्प लिया है।
- गैर-जीवाश्म स्रोतों में सौर, पवन, जल और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर नवीकरणीय ऊर्जा के प्रसारण के लिए विशेष ट्रांसमिशन नेटवर्क है।
- पीएम सूर्य घर योजना रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।
ऊर्जा राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन एक दीर्घकालिक और सतत प्रक्रिया है। 520 गीगावॉट से अधिक स्थापित क्षमता और नवीकरणीय स्रोतों की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ भारत 2030 और 2070 के जलवायु लक्ष्यों की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सतत विकास की राह पर मजबूती से स्थापित कर रहा है।