29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक समापन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बीटिंग रिट्रीट समारोह में भाग लेकर भारत के गणतंत्र दिवस समारोहों के औपचारिक समापन को चिह्नित किया। हर वर्ष 29 जनवरी को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भारत की सैन्य परंपराओं, अनुशासन और सेवा भावना को समर्पित एक गरिमामय समारोह होता है।
सैन्य गरिमा और राष्ट्रीय परंपरा का प्रदर्शन
बीटिंग रिट्रीट समारोह में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बैंडों द्वारा सामंजस्यपूर्ण और लयबद्ध संगीत प्रस्तुतियाँ दी गईं। इन प्रदर्शनों में भारतीय सशस्त्र बलों की पुरातन परंपराओं और पेशेवर अनुशासन की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और शीर्ष सैन्य कमांडर भी उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री का संदेश: रक्षा परंपरा का सम्मान
समारोह से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर को भारत की स्थायी रक्षा परंपराओं का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि बीटिंग रिट्रीट समारोह सशस्त्र बलों की शक्ति, निरंतरता और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का प्रतीक है। उन्होंने एकता और साहस के मूल्यों को रेखांकित करते हुए सेना के योगदान को राष्ट्र के लिए केंद्रीय बताया।
समारोह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बीटिंग रिट्रीट की जड़ें प्राचीन सैन्य परंपराओं में हैं। भारत में यह समारोह गणतंत्र दिवस के तीन दिन बाद आयोजित किया जाता है और आमतौर पर नई दिल्ली के विजय चौक पर होता है। इस कार्यक्रम में परंपरागत रूप से झंडा अवरोहण और टुकड़ियों की औपचारिक वापसी शामिल होती है, जो राष्ट्रीय उत्सवों की समाप्ति का संकेत देती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बीटिंग रिट्रीट समारोह हर वर्ष 29 जनवरी को आयोजित किया जाता है।
- यह गणतंत्र दिवस समारोहों के औपचारिक समापन का प्रतीक होता है।
- इसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बैंड हिस्सा लेते हैं।
- यह कार्यक्रम नई दिल्ली के विजय चौक पर संपन्न होता है।
प्रतीकात्मकता और राष्ट्रीय महत्व
बीटिंग रिट्रीट अपने संगीतिक वैभव और सुसंगठित सैन्य प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। यह समारोह भारत की सशस्त्र सेनाओं की अनुशासन, समन्वय और प्रतिबद्धता को उजागर करता है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की उपस्थिति इस आयोजन को संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व प्रदान करती है, जो देश के लोकतांत्रिक ढाँचे में सैन्य प्रतिष्ठान के प्रति सम्मान को भी सुदृढ़ करती है।
यह आयोजन राष्ट्र की सैन्य गरिमा और जन-गौरव का एक सजीव प्रतीक बनकर हर वर्ष भारतीय गणतंत्र को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।