2026 में विश्व पैंगोलिन दिवस से पहले अवैध व्यापार का चौंकाने वाला खुलासा
विश्व पैंगोलिन दिवस 2026 के अवसर पर जारी एक वैश्विक रिपोर्ट ने अवैध वन्यजीव व्यापार की भयावह सच्चाई को उजागर किया है। 2016 से 2024 के बीच दुनिया भर में 5.53 लाख से अधिक पैंगोलिन जब्त किए गए। यह आंकड़ा न केवल संगठित तस्करी नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाता है, बल्कि इन दुर्लभ स्तनधारियों के अस्तित्व पर मंडराते गंभीर खतरे को भी रेखांकित करता है। रिपोर्ट के अनुसार, आठ वर्षों में 49 देशों में 2,222 जब्ती मामलों में कुल 5,53,042 पैंगोलिन शामिल थे और कम से कम 74 देश इस अवैध व्यापार से जुड़े पाए गए।
अवैध व्यापार का पैमाना और प्रमुख मार्ग
रिपोर्ट बताती है कि जब्त की गई वस्तुओं में लगभग 99 प्रतिशत पैंगोलिन के अंग, विशेषकर उनकी शल्क (स्केल्स) थे। चीन और वियतनाम मुख्य कथित गंतव्य देशों के रूप में सामने आए, जबकि नाइजीरिया, मोजाम्बिक, कैमरून और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य प्रमुख स्रोत देश रहे। कुल जब्ती मामलों में से 96 प्रतिशत केवल 10 देशों में दर्ज किए गए।
अवैध व्यापार 178 अलग-अलग तस्करी मार्गों के माध्यम से संचालित हुआ, जो अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध की जटिलता को दर्शाता है। हालांकि प्रवर्तन एजेंसियों ने सख्ती दिखाई है, फिर भी सभी आठ पैंगोलिन प्रजातियां इस व्यापार की चपेट में हैं। अत्यधिक दोहन, घरेलू उपयोग और आवास विनाश के कारण इनकी स्थिति अत्यंत संकटग्रस्त हो चुकी है।
गंभीर खतरे में पैंगोलिन प्रजातियां
पैंगोलिन शल्कयुक्त स्तनधारी हैं और विश्व में इनकी चार एशियाई तथा चार अफ्रीकी प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें ‘मैनिस ट्राइकस्पिस’ (श्वेत-उदर पैंगोलिन) सबसे अधिक मात्रा में तस्करी की गई प्रजाति रही, जबकि ‘मैनिस टेमिन्की’ (टेमिन्क्स पैंगोलिन) जब्ती घटनाओं में सबसे अधिक दर्ज हुई। टेमिन्क्स पैंगोलिन, जो दक्षिण अफ्रीका में पाई जाने वाली एकमात्र प्रजाति है, के तीन पीढ़ियों में 30 से 40 प्रतिशत तक घटने की आशंका जताई गई है।
हालांकि 59 प्रतिशत जब्त मामलों में प्रजाति की पहचान की गई, जो 2021 के 40 प्रतिशत से बेहतर है, फिर भी कुल तस्करी की गई मात्रा का 83 प्रतिशत हिस्सा प्रजाति-विशिष्ट नहीं था। इससे लक्षित संरक्षण रणनीतियों को लागू करने में कठिनाई होती है।
भारत में संरक्षण की चुनौतियां
भारत में दो प्रजातियां पाई जाती हैं—भारतीय पैंगोलिन (मैनिस क्रैसिकौडेटा) और चीनी पैंगोलिन (मैनिस पेंटाडैक्टाइला)। ये हिमालय की तराई से लेकर प्रायद्वीपीय वनों तक विभिन्न क्षेत्रों में वितरित हैं। भारत वैश्विक स्तर पर प्रमुख तस्करी केंद्र नहीं है, लेकिन यह एक आवासीय और गंतव्य देश दोनों की भूमिका निभाता है।
भारत में 2021 की रिपोर्टिंग के अनुसार इन प्रजातियों को ‘डेटा डिफिशिएंट’ श्रेणी में रखा गया, जिससे इनके वास्तविक जनसंख्या आंकड़ों की कमी उजागर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावी प्रवर्तन, अद्यतन जनसंख्या सर्वेक्षण और बेहतर प्रजाति पहचान तकनीकों की आवश्यकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* पैंगोलिन एकमात्र ऐसे स्तनधारी हैं जिनका पूरा शरीर केराटिन की शल्कों से ढका होता है।
* विश्व की सभी आठ पैंगोलिन प्रजातियां साइट्स (CITES) के परिशिष्ट-1 में सूचीबद्ध हैं, जिससे इनके अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध है।
* 2016 से 2024 के बीच 5,53,042 पैंगोलिन जब्त किए गए।
* अवैध व्यापार 74 देशों और 178 तस्करी मार्गों से जुड़ा पाया गया।
स्पष्ट है कि पैंगोलिन का भविष्य गंभीर संकट में है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सख्त कानूनी प्रवर्तन और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से ही इस अद्वितीय प्रजाति को विलुप्ति के कगार से बचाया जा सकता है। विश्व पैंगोलिन दिवस केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए कार्रवाई का आह्वान है।