1965 युद्ध के वीर चक्र विजेता के. जी. जॉर्ज का 95 वर्ष की आयु में निधन
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वीर चक्र से सम्मानित नायक लांस हवलदार के. जी. जॉर्ज (सेवानिवृत्त) का 95 वर्ष की आयु में केरल में निधन हो गया। उन्होंने कोट्टायम स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। जॉर्ज भारतीय सेना में अपने साहस और समर्पण के लिए जाने जाते थे। विशेष रूप से युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मन के हमलों के बीच महत्वपूर्ण संचार लाइनों को बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिससे अग्रिम मोर्चे पर तैनात भारतीय सैनिकों के बीच समन्वय बना रहा।
प्रारंभिक जीवन और सैन्य सेवा
के. जी. जॉर्ज का जन्म फरवरी 1931 में केरल में हुआ था। बाद में उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स में सेवा दी। यह सेना की एक विशेष शाखा है जो युद्ध के दौरान विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच संचार व्यवस्था को बनाए रखने का कार्य करती है। वर्ष 1911 में स्थापित इस इकाई का युद्ध अभियानों में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान होता है। इस इकाई में सेवा करते हुए जॉर्ज युद्ध के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण संचार कार्यों से जुड़े रहे।
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वीरता
के. जी. जॉर्ज को 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके अद्वितीय साहस के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। आधिकारिक विवरण के अनुसार 6 से 10 सितंबर 1965 के बीच उन्होंने वाघा सेक्टर में दुश्मन की भारी गोलाबारी और हवाई हमलों के बावजूद संचार लाइनों को बहाल करने का नेतृत्व किया। 8 और 9 सितंबर की रात उन्होंने अपने जीवन की परवाह किए बिना ब्रिगेड मुख्यालय और अग्रिम मोर्चे पर तैनात बटालियनों के बीच संचार स्थापित किया। उनके इस साहसिक प्रयास से युद्ध के महत्वपूर्ण चरण में सेना के बीच समन्वय बना रहा।
वीर चक्र से सम्मान
अत्यंत कठिन युद्ध परिस्थितियों में असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा दिखाने के लिए के. जी. जॉर्ज को वीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह सम्मान युद्ध के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों द्वारा प्रदर्शित बहादुरी के लिए दिया जाता है। उनकी वीरता, पेशेवर क्षमता और मिशन के प्रति समर्पण भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा का उदाहरण माने जाते हैं।
अंतिम संस्कार की व्यवस्था
परिवार के अनुसार जॉर्ज का अंतिम संस्कार कोट्टायम में किया जाएगा। उनके कुछ करीबी परिजन विदेश में रहते हैं और उनके भारत पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण दुबई में रहने वाले कुछ रिश्तेदारों की यात्रा में देरी हुई है। तब तक उनके पार्थिव शरीर को स्थानीय शवगृह में सुरक्षित रखा गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वीर चक्र भारत का तीसरा सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है, जो परम वीर चक्र और महा वीर चक्र के बाद आता है।
- भारतीय सेना का कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स 15 फरवरी 1911 को स्थापित किया गया था।
- 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध मुख्य रूप से कश्मीर क्षेत्र को लेकर लड़ा गया था।
- भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित वाघा सेक्टर इस युद्ध के दौरान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र था।
के. जी. जॉर्ज का जीवन भारतीय सैनिकों की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा। उनके योगदान ने न केवल युद्ध के दौरान सेना की सफलता में भूमिका निभाई बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और देशभक्ति की प्रेरणा भी प्रदान की।