1962 के वीरों को नमन: अरुणाचल प्रदेश में मनाया गया केपांग ला दिवस

1962 के वीरों को नमन: अरुणाचल प्रदेश में मनाया गया केपांग ला दिवस

हर वर्ष 17 नवंबर को मनाया जाने वाला केपांग ला दिवस उन सैनिकों और स्थानीय नागरिकों के साहस को सम्मानित करता है जिन्होंने 1962 के युद्ध के दौरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस पहाड़ी दर्रे की रक्षा में अदम्य वीरता दिखाई। इस वर्ष अरुणाचल प्रदेश के तूतिंग (Upper Siang) में आयोजित समारोहों में ऐतिहासिक युद्ध की स्मृति को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ युवाओं को देशभक्ति और इतिहास से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।

केपांग ला की रक्षा में सैनिकों और ग्रामीणों का बलिदान

अरुणाचल प्रदेश के Upper Siang ज़िले में स्थित केपांग ला दर्रा (ऊँचाई लगभग 1,455 मीटर) ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान एक निर्णायक मोर्चे के रूप में इतिहास में अपनी पहचान दर्ज की। सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय सैनिकों और स्थानीय ग्रामीणों ने अग्रसर होती चीनी सेना के विरुद्ध साहसिक प्रतिरोध किया। केपांग ला दिवस इन्हीं वीरों की अमर गाथा को जीवित रखता है और आने वाली पीढ़ियों को देश की सीमाओं की रक्षा में दिए गए बलिदान की याद दिलाता है।

युवाओं की भागीदारी से सजी स्मृति यात्रा

मुख्य समारोह से पूर्व भारतीय सेना की स्पीयर कॉर्प्स द्वारा तूतिंग में एक इंटर-स्कूल प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें छात्रों ने भाषण, निबंध और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से केपांग ला की ऐतिहासिक व सामरिक महत्ता को समझा। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय युवाओं में देशभक्ति की भावना जागृत करना और सेना व नागरिक समाज के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना था।

सामुदायिक एकता और सम्मान की भावना

कार्यक्रम में तूतिंग-यिंगक्योंग के विधायक आलो लिबांग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने 1962 के वीरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि केपांग ला दिवस न केवल एक स्मरण दिवस है बल्कि सामुदायिक एकता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक भी है। उन्होंने तूतिंग को एक मॉडल सीमा नगर के रूप में विकसित करने की दिशा में सेना और नागरिक प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। जिला अधिकारियों और सेना के वरिष्ठ कर्मियों की उपस्थिति ने समारोह को और गरिमामय बना दिया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • स्थान: केपांग ला, ऊपरी सियांग जिला, अरुणाचल प्रदेश।
  • ऊँचाई: लगभग 1,455 मीटर।
  • ऐतिहासिक महत्व: 1962 के युद्ध में सैनिकों और ग्रामीणों ने दर्रे की रक्षा की।
  • नेतृत्व: भारतीय सेना की स्पीयर कॉर्प्स द्वारा प्रतिवर्ष आयोजन।
  • पूर्व भूमिका: युद्ध से पहले यह एक पारंपरिक व्यापार मार्ग था।

केपांग ला की विरासत और प्रेरणा

केपांग ला केवल एक पर्वतीय दर्रा नहीं, बल्कि भारतीय वीरता और सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक है। इसकी स्मृति से जुड़े कार्यक्रम न केवल क्षेत्र की ऐतिहासिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि युवाओं में सीमांत क्षेत्रों की रक्षा और देशभक्ति की भावना को भी प्रबल करते हैं।

Originally written on November 18, 2025 and last modified on November 18, 2025.

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