17 वर्षीय अनाहत सिंह ने रचा इतिहास: भारत को मिला स्क्वैश का नया सितारा
भारतीय स्क्वैश में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। मात्र 17 वर्ष की उम्र में अनाहत सिंह ने दुनिया की टॉप-10 खिलाड़ी को हराकर PSA ब्रॉन्ज स्तर का खिताब जीत लिया है। यह जीत न केवल अनाहत के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है, बल्कि भारत के वैश्विक स्क्वैश पर बढ़ते प्रभुत्व का भी प्रतीक है।
वॉशिंगटन में ऐतिहासिक जीत
Squash On Fire Open टूर्नामेंट के फाइनल में अनाहत ने विश्व की नंबर 10 और शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी जॉर्जिना कैनेडी को सीधे गेमों में पराजित किया। भारतीय सातवीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी ने मुकाबला 12-10, 11-5, 11-7 से मात्र 26 मिनट में जीत लिया। कैनेडी कॉमनवेल्थ गेम्स की चैंपियन रह चुकी हैं, लेकिन अनाहत ने उन्हें कोई भी लय पकड़ने का मौका नहीं दिया।
यह खिताब अनाहत का पहला PSA ब्रॉन्ज खिताब है और उनका कुल 15वां प्रोफेशनल टाइटल है।
विश्व की टॉप-20 में पहुंचने वाली सबसे युवा एशियाई खिलाड़ी
इस जीत से अनाहत विश्व रैंकिंग में शीर्ष 20 में शामिल हो गई हैं, जिससे वे यह उपलब्धि हासिल करने वाली सबसे युवा एशियाई खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने यह मुकाम सिर्फ 26 PSA टूर इवेंट्स में भाग लेकर हासिल किया, जो उनके खेल कौशल और निरंतर प्रदर्शन को दर्शाता है।
फाइनल के पहले गेम में 8-10 से पिछड़ने के बावजूद अनाहत ने शानदार वापसी की और 12-10 से गेम जीतकर पूरे मुकाबले का रुख अपने पक्ष में मोड़ दिया।
PSA टूर पर तीव्र और संतुलित उभार
अनाहत की सफलता कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि एक योजनाबद्ध और अनुशासित उभार का परिणाम है। वे पिछले वर्ष चेन्नई में भारत को पहली बार स्क्वैश वर्ल्ड कप जिताने वाली टीम का हिस्सा थीं। इसके अलावा उन्होंने इस सीज़न में कैनेडियन वुमेंस ओपन (PSA सिल्वर स्तर) के सेमीफाइनल तक भी सफर तय किया।
इन सभी उपलब्धियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अनाहत अब विश्व स्तर के खिलाड़ियों को नियमित रूप से चुनौती देने में सक्षम हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PSA (Professional Squash Association) स्क्वैश का वैश्विक संचालन निकाय है।
- PSA टूर के इवेंट्स को Platinum, Gold, Silver, Bronze और Challenger श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
- भारत ने 2025 में चेन्नई में पहली बार स्क्वैश वर्ल्ड कप जीता था।
- कॉमनवेल्थ गेम्स में स्क्वैश एक पदक खेल के रूप में शामिल है।
कोचिंग और भविष्य की दिशा
अनाहत के कोच स्टेफन गलीफी ने उन्हें “प्रतिभाशाली” बताते हुए उनकी परिपक्वता, रणनीतिक सोच और सीखने की तीव्रता की सराहना की है। आने वाले समय में उनका फोकस अधिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने, वैश्विक स्तर के खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण करने और फिटनेस के उच्चतम मानकों को हासिल करने पर रहेगा।
अनाहत सिंह की यह उपलब्धि ना सिर्फ भारत के लिए गौरव का विषय है, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है कि कम उम्र में भी अनुशासन, मेहनत और रणनीति के बल पर विश्व स्तर पर सफलता पाई जा सकती है।