14,400 वर्ष पुराना ऊनी गैंडे का जीनोम: विलुप्ति के रहस्यों की नई जानकारी
करीब 14,400 साल पहले, बर्फ युग के दौरान साइबेरिया के टुमाट गांव के पास एक छोटे भेड़िये के बच्चे ने ऊनी गैंडे का मांस खाया था। बाद में यह बच्चा पर्माफ्रॉस्ट में सुरक्षित मिला और वैज्ञानिकों को इसके पेट में बिना पचा ऊनी गैंडे का मांस मिला। इसी सामग्री से वैज्ञानिकों ने पहली बार ऊनी गैंडे का पूर्ण जीनोम प्राप्त किया है, जिससे इस विलुप्त प्रजाति के जीवन और विलुप्ति को लेकर अहम जानकारी सामने आई है।
जीनोम की खोज और महत्व
वैज्ञानिकों ने इस ममीभूत भेड़िये के पेट से मांस का टुकड़ा निकाला और उसमें से डीएनए निकालकर ऊनी गैंडे (Coelodonta antiquitatis) का उच्च गुणवत्ता वाला जीनोम तैयार किया। यह गैंडे ठंडी जलवायु में रहने वाले शाकाहारी जीव थे, जो उत्तरी यूरोप और एशिया में पाए जाते थे।
विलुप्ति के कारणों पर रोशनी
इस जीनोम की तुलना 18,000 और 49,000 वर्ष पुराने दो अन्य ऊनी गैंडों से की गई। अध्ययन में पता चला कि
- विलुप्त होने से पहले तक इन गैंडों की आनुवंशिक स्थिति मजबूत थी।
- इनब्रीडिंग या आबादी में गिरावट का कोई प्रमाण नहीं मिला।
- इसका मतलब है कि ऊनी गैंडों की विलुप्ति अचानक हुई, न कि धीरे-धीरे।
जलवायु परिवर्तन: मुख्य कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार, 14,000 साल पहले अचानक मौसम में गर्मी आ गई, जिससे स्टेपी-टुंड्रा पारिस्थितिकी तंत्र समाप्त हो गया।
- यह वही पारिस्थितिकी तंत्र था जिस पर ऊनी गैंडे निर्भर थे।
- जैसे ही उनका प्राकृतिक आवास खत्म हुआ, यह प्रजाति भी तेजी से समाप्त हो गई।
- उस समय मनुष्य भी वहां मौजूद थे, लेकिन डीएनए और पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि मनुष्यों का शिकार इसका प्रमुख कारण नहीं था।
अध्ययन का वैज्ञानिक महत्व
यह शोध Genome Biology and Evolution नामक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ।
- प्रमुख वैज्ञानिक: सॉल्वेग गुडजोंसडॉतिर और लव डालेन, Centre for Palaeogenetics (स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और स्वीडिश म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री) से।
- यह अध्ययन दिखाता है कि पर्माफ्रॉस्ट में संरक्षित सामग्री से भी पूर्ण जीनोम निकाला जा सकता है, जिससे हमें विलुप्त प्रजातियों और जलवायु आधारित विलुप्ति को समझने में मदद मिलती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ऊनी गैंडे का वैज्ञानिक नाम: Coelodonta antiquitatis
- विलुप्ति का समय: लगभग 14,000 वर्ष पूर्व, आखिरी आइस एज के अंत में।
- जीनोम की प्राप्ति: पर्माफ्रॉस्ट में संरक्षित मांस से।
- विलुप्ति का कारण: जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश।
- मनुष्यों की भूमिका: प्रमुख कारण नहीं मानी गई।
यह खोज न केवल एक विलुप्त प्रजाति के बारे में नई जानकारी देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि पुरानी जैविक सामग्री से आधुनिक विज्ञान कैसे भविष्य के लिए सबक निकाल सकता है।