1 फरवरी से तंबाकू और पान मसाला पर नया कर ढांचा लागू: स्वास्थ्य सुरक्षा और राजस्व संतुलन की नई नीति
भारत सरकार ने तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर नए वित्तीय उपकरों को 1 फरवरी 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की है। यह बदलाव “सिन गुड्स” (Sin Goods) के कर ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है, जिसमें अब तक लगाए जा रहे मुआवजा उपकर (Compensation Cess) को हटाकर उत्पाद-विशिष्ट शुल्क लगाए जाएंगे। यह नई कर नीति गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) प्रणाली के बाहर संचालित होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वित्तीय योगदान करेगी।
1 फरवरी से बदल रहा है कर ढांचा
नई अधिसूचना के अनुसार, तंबाकू और संबंधित उत्पादों पर अब अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Additional Excise Duty) लगाया जाएगा, जबकि पान मसाला पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर (Health and National Security Cess) लागू किया जाएगा। ये शुल्क लागू जीएसटी दरों के अतिरिक्त होंगे। इस बदलाव के साथ वह मुआवजा उपकर समाप्त हो जाएगा, जो जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की राजस्व क्षति की भरपाई के लिए लगाया जाता था।
तंबाकू उत्पादों पर संशोधित GST दरें
1 फरवरी से सिगरेट, तंबाकू, पान मसाला और इसी प्रकार के उत्पादों पर 40 प्रतिशत की जीएसटी दर लागू होगी। हालांकि, बीड़ी (Biris) पर 18 प्रतिशत की कम दर जारी रहेगी। यह दर ढांचा इस नीति भावना को दर्शाता है कि बीड़ी जैसे उत्पादों से जुड़े निम्न आय वर्ग को अत्यधिक कर बोझ से राहत दी जाए, जबकि अन्य उत्पादों पर उच्च कर से हतोत्साहन किया जाए।
स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर का उद्देश्य
नया Health and National Security Cess विशेष रूप से पान मसाला निर्माण पर लागू होगा, जबकि तंबाकू उत्पादों पर अलग से अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। दोनों उपकर जीएसटी ढांचे के बाहर संचालित होंगे। इनका उद्देश्य केवल राजस्व अर्जन नहीं, बल्कि हानिकारक उपभोग को हतोत्साहित करना और स्वास्थ्य तथा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में समर्पित निधि सुनिश्चित करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तंबाकू और पान मसाला पर लागू मुआवजा उपकर अब नए शुल्कों से प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
- सिगरेट और पान मसाला पर संशोधित GST दर 40% होगी।
- बीड़ी पर अपेक्षाकृत कम 18% GST दर लागू रहेगी।
- Health and National Security Cess जीएसटी प्रणाली के बाहर एक स्वतंत्र उपकर है।
विधायी स्वीकृति और नीति का उद्देश्य
इन नए शुल्कों के लिए कानूनी आधार संसद द्वारा दिसंबर 2025 में पारित दो विधेयकों के माध्यम से प्रदान किया गया। इन विधेयकों ने पान मसाला पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर तथा तंबाकू पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की विधायी अनुमति दी। यह कदम भारत सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है हानिकारक उत्पादों की खपत को नियंत्रित करना और राजस्व अर्जन को मुआवजा उपकर प्रणाली से परे विस्तारित करना।
यह नीति बदलाव न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्वास्थ्य केंद्रित कर नीति के मार्ग पर भारत के बढ़ते कदमों को भी दर्शाता है।