हैदराबाद में भारत का पहला राष्ट्रीय जनजातीय चिकित्सक क्षमता निर्माण कार्यक्रम: आदिवासी स्वास्थ्य सेवा को मिलेगा नया आधार

हैदराबाद में भारत का पहला राष्ट्रीय जनजातीय चिकित्सक क्षमता निर्माण कार्यक्रम: आदिवासी स्वास्थ्य सेवा को मिलेगा नया आधार

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 16–17 जनवरी 2026 को तेलंगाना के हैदराबाद में देश का पहला राष्ट्रीय जनजातीय चिकित्सक क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। “जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य पहुँच को सुदृढ़ करने” की थीम पर आधारित यह पहल भारत में पारंपरिक जनजातीय चिकित्सा ज्ञान को औपचारिक स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कार्यक्रम जनजातीय समुदायों को स्वास्थ्य भागीदार के रूप में मान्यता देने और क्षेत्रीय स्वास्थ्य विषमताओं को कम करने के लिए प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उच्चस्तरीय भागीदारी और नीतिगत प्रतिबद्धता

इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुयाल ओराम, राज्य मंत्री दुर्गादास उइके और मंत्रालय की सचिव रंजन चोपड़ा भाग लेंगे। इन प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत सरकार अब सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील, प्रमाण-आधारित और समुदाय केंद्रित स्वास्थ्य पहलों को नीतिगत प्राथमिकता दे रही है, विशेषकर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए।

भारत ट्राइबल हेल्थ ऑब्जर्वेटरी की स्थापना

कार्यक्रम की एक मुख्य उपलब्धि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद – क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र, भुवनेश्वर (ICMR–RMRC) और जनजातीय कार्य मंत्रालय के बीच भारत ट्राइबल हेल्थ ऑब्जर्वेटरी (Bharat Tribal Health Observatory) की स्थापना हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) का हस्ताक्षर होगा। यह पहल परियोजना दृष्टि (Project DRISTI) के अंतर्गत कार्यान्वित की जाएगी।

यह वेधशाला पहली बार जनजाति-वार स्वास्थ्य निगरानी, कार्यान्वयन अनुसंधान और अनुसंधान-आधारित रोग उन्मूलन रणनीतियों को संस्थागत रूप देगी। इससे जनजातीय स्वास्थ्य डेटा में मौजूदा अंतर को पाटने और साक्ष्य-आधारित नीतियों के निर्माण में मदद मिलेगी।

जनजातीय स्वास्थ्य पहलों को नई गति

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वर्षों से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन और टीबी, कुष्ठ रोग व मलेरिया जैसी बीमारियों पर केंद्रित कार्यक्रमों के साथ मिलकर जनजातीय स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने का कार्य किया है। पीएम जनमान योजना और DAJGUA जैसे प्रमुख कार्यक्रमों ने जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा और अवसंरचना को मजबूती दी है। इन पहलों से यह मंत्रालय स्वास्थ्य समानता लाने के प्रमुख संस्थान के रूप में उभरा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यह कार्यक्रम भारत में जनजातीय चिकित्सकों के लिए आयोजित पहला राष्ट्रीय स्तर का क्षमता निर्माण कार्यक्रम है।
  • भारत ट्राइबल हेल्थ ऑब्जर्वेटरी जनजाति-वार स्वास्थ्य निगरानी की सुविधा प्रदान करेगा।
  • यह पहल परियोजना दृष्टि के अंतर्गत शुरू की जा रही है।
  • कार्यक्रम का फोकस सिकल सेल एनीमिया, टीबी और वेक्टर जनित रोगों जैसे क्षेत्रों में जनजातीय स्वास्थ्य सुधार पर है।

पारंपरिक ज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य का समन्वय

इस कार्यक्रम को ICMR, AIIMS नई दिल्ली, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का तकनीकी सहयोग प्राप्त है। यह पहल जनजातीय चिकित्सकों के लिए संरचित प्रशिक्षण, डिजिटल स्वास्थ्य निगरानी, नैतिक सुरक्षा मानकों और रेफरल-आधारित क्षमता निर्माण को बढ़ावा देती है।

इसका उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सकीय ज्ञान और आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के बीच सशक्त समन्वय स्थापित करना है, ताकि जनजातीय क्षेत्रों में विश्वसनीय, सुलभ और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। यह प्रयास भारत के समावेशी और न्यायसंगत स्वास्थ्य ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

Originally written on January 16, 2026 and last modified on January 16, 2026.

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