हीलियम संकट का असर: भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग पर मंडराता खतरा

हीलियम संकट का असर: भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग पर मंडराता खतरा

भारत का सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग एक संभावित संकट का सामना कर रहा है, जिसका कारण कतर के रास लाफान एलएनजी हब पर हुए हमले के बाद हीलियम आपूर्ति पर बढ़ती अनिश्चितता है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब भारत वैश्विक चिप निर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सेमीकंडक्टर निर्माण में हीलियम का महत्व

हीलियम एक निष्क्रिय गैस है, जो सेमीकंडक्टर निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका उपयोग कूलिंग सिस्टम, परीक्षण प्रक्रियाओं और उच्च-परिशुद्धता वाले निर्माण कार्यों में किया जाता है। चूंकि इसका कोई सस्ता और प्रभावी विकल्प उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसकी आपूर्ति में बाधा उद्योग के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। वर्तमान में कंपनियां उत्पादन जारी रखे हुए हैं, लेकिन संभावित जोखिम को देखते हुए वैकल्पिक योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

कीमतों में तेजी और आपूर्ति संकट

वैश्विक बाजार में हीलियम की कीमतों में अचानक 35% से 100% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। कई क्षेत्रों में इसकी आपूर्ति सीमित हो गई है, जिससे कंपनियों को निर्धारित कोटा के आधार पर वितरण करना पड़ रहा है। भारत में भी कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और फिलहाल प्रभाव मुख्य रूप से कीमतों तक सीमित है, लेकिन भविष्य में आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर प्रभाव

हीलियम की कमी का सीधा असर सेमीकंडक्टर निर्माण और परीक्षण इकाइयों पर पड़ सकता है। हालांकि भारत में पीसीबी असेंबली में इसका उपयोग कम होता है, लेकिन अप्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देने लगे हैं। परियोजनाओं में देरी, उपकरणों की स्थापना में बाधा और कच्चे माल की खरीद में धीमापन देखा जा रहा है। इससे उद्योग में सतर्कता और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • हीलियम एक निष्क्रिय (नोबल) गैस है, जो प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण से प्राप्त होती है।
  • कतर का रास लाफान विश्व के सबसे बड़े एलएनजी निर्यात केंद्रों में से एक है।
  • सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अत्यधिक स्वच्छ और नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है।
  • भारत ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा दे रहा है।

सिरेमिक आपूर्ति में बाधा का अतिरिक्त दबाव

इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को एक और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जो विशेष सिरेमिक सामग्री की कमी से जुड़ी है। गुजरात के मोरबी में स्थित 550 से अधिक सिरेमिक इकाइयों के बंद होने से आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह क्षेत्र भारत की लगभग 80% सिरेमिक उत्पादन क्षमता के लिए जिम्मेदार है। इसके कारण मल्टीलेयर सिरेमिक कैपेसिटर जैसे महत्वपूर्ण घटकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, जो स्मार्टफोन, लैपटॉप और ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स में आवश्यक होते हैं।

इस संकट के कारण कीमतों में लगभग 5% की वृद्धि देखी गई है और यदि स्थिति बनी रहती है, तो यह बढ़कर 10% से 20% तक पहुंच सकती है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

इस प्रकार, हीलियम और सिरेमिक दोनों क्षेत्रों में उत्पन्न चुनौतियां भारत के उभरते सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए गंभीर संकेत हैं, जिनसे निपटने के लिए रणनीतिक योजना और आपूर्ति विविधीकरण की आवश्यकता होगी।

Originally written on March 27, 2026 and last modified on March 27, 2026.

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