हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सांभर हिरण की पहली बार पुष्टि

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सांभर हिरण की पहली बार पुष्टि

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के उच्च पर्वतीय संरक्षित क्षेत्रों में पहली बार सांभर हिरण की उपस्थिति दर्ज की गई है। यह महत्वपूर्ण खोज राज्य के वन विभाग के वन्यजीव प्रकोष्ठ द्वारा कैमरा ट्रैप निगरानी के माध्यम से की गई। आमतौर पर सांभर हिरण को निचले शिवालिक क्षेत्रों और आर्द्र पर्णपाती जंगलों से जोड़ा जाता है, इसलिए ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में इसकी उपस्थिति एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक अवलोकन मानी जा रही है। इस खोज से संबंधित अध्ययन “रिकॉर्ड्स ऑफ द जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया” के फरवरी तिमाही अंक में प्रकाशित किया गया है, जिससे वन्यजीव अनुसंधान के लिए इस जानकारी का महत्व और बढ़ गया है।

कैमरा ट्रैप से हुई महत्वपूर्ण खोज

वन अधिकारियों ने कैमरा ट्रैप तकनीक की सहायता से सांभर हिरण (Rusa unicolor) की उपस्थिति को कालाटोप-खज्जियार वन्यजीव अभयारण्य और गमगुल वन्यजीव अभयारण्य में दर्ज किया। कैमरों में वयस्क और किशोर नर सांभर हिरणों की तस्वीरें कैद हुईं, जो एक जलस्रोत के पास आते हुए दिखाई दिए। अधिकतर गतिविधियां शाम और रात के समय दर्ज की गईं। इन अवलोकनों से संकेत मिलता है कि यह प्रजाति संभवतः हिमालय के उच्च क्षेत्रों में अपना विस्तार कर रही है।

उच्च पर्वतीय आवास और पारिस्थितिक कारण

कालाटोप-खज्जियार वन्यजीव अभयारण्य समुद्र तल से लगभग 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है, जबकि गमगुल वन्यजीव अभयारण्य की ऊंचाई 3000 मीटर से भी अधिक है। इतनी ऊंचाई पर सांभर हिरण की उपस्थिति का कारण वहां के घने शंकुधारी जंगल, स्थायी जल स्रोत और अपेक्षाकृत शांत प्राकृतिक वातावरण हो सकते हैं। ये सभी पारिस्थितिक परिस्थितियां बड़े शाकाहारी जीवों के लिए उपयुक्त आश्रय और भोजन उपलब्ध कराती हैं।

एक ही क्षेत्र में तीन हिरण प्रजातियों का सह-अस्तित्व

इस खोज का एक रोचक पहलू यह भी है कि कालाटोप-खज्जियार वन्यजीव अभयारण्य में तीन अलग-अलग हिरण प्रजातियां एक ही क्षेत्र में पाई गई हैं। सांभर हिरण के अलावा यहां कस्तूरी मृग और भौंकने वाला हिरण भी दर्ज किए गए हैं। सामान्यतः ये प्रजातियां अलग-अलग प्रकार के आवासों में पाई जाती हैं, इसलिए एक ही परिदृश्य में इनका सह-अस्तित्व वन्यजीव शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक अवलोकन है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्व

वन अधिकारियों के अनुसार यह नई जानकारी दो संभावनाओं की ओर संकेत करती है। पहली, यह कि इस क्षेत्र में पहले से सांभर हिरण की एक छोटी आबादी मौजूद थी जो अब तक दर्ज नहीं हो पाई थी। दूसरी संभावना यह है कि आसपास के जंगलों के साथ पारिस्थितिक संपर्क के कारण यह प्रजाति धीरे-धीरे नए क्षेत्रों में फैल रही है। चंबा जिले में लगभग 985 वर्ग किलोमीटर संरक्षित वन क्षेत्र है, जो हिमालयी वन्यजीवों की विविधता के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करता है। यह खोज पश्चिमी हिमालय के उच्च पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और निगरानी के महत्व को भी रेखांकित करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सांभर हिरण (Rusa unicolor) दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी हिरण प्रजाति मानी जाती है।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में सांभर हिरण को “असुरक्षित” श्रेणी में रखा गया है।
  • भारत में यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची तीन के अंतर्गत संरक्षित है।
  • चंबा जिले के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्यों में कालाटोप-खज्जियार, गमगुल, कुगती, टुंडाह और सेचू तुआन नाला शामिल हैं।

यह खोज हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में भी वन्यजीवों के नए वितरण पैटर्न विकसित हो रहे हैं, जिनका अध्ययन भविष्य में संरक्षण रणनीतियों के निर्माण में सहायक हो सकता है।

Originally written on March 9, 2026 and last modified on March 9, 2026.

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