हवाई यात्रा में सेहत सुधारने के लिए पांच मिनट का योग प्रोटोकॉल
आज के समय में हवाई यात्रा आम हो चुकी है, लेकिन लंबी उड़ानों के दौरान यात्रियों को शारीरिक और मानसिक असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयुष मंत्रालय ने एक विशेष पांच मिनट का इन-फ्लाइट योग प्रोटोकॉल शुरू किया है। यह पहल योग महोत्सव 2026 के दौरान लॉन्च की गई, जिसका उद्देश्य यात्रियों को यात्रा के दौरान ही सरल योग अभ्यास के माध्यम से स्वस्थ और आरामदायक अनुभव प्रदान करना है। यह कदम निवारक स्वास्थ्य सेवा को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
निवारक स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने इस पहल को स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अहम बताया। उन्होंने कहा कि योग केवल बीमारी के इलाज का माध्यम नहीं, बल्कि उससे पहले ही स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का प्रभावी उपाय है। इस पहल के जरिए सरकार लोगों को यह संदेश देना चाहती है कि सीमित जगहों, जैसे विमान के भीतर भी, व्यक्ति अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकता है। यह योग को एक दैनिक आदत के रूप में अपनाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।
लंबी उड़ानों से जुड़ी समस्याओं का समाधान
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से शरीर में अकड़न, थकान, रक्तसंचार में कमी और तनाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) जैसे गंभीर जोखिम को भी जन्म दे सकती है। नए योग प्रोटोकॉल में ऐसे सरल अभ्यास शामिल किए गए हैं, जो शरीर को सक्रिय बनाए रखते हैं और इन समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं। इससे यात्रियों को यात्रा के दौरान अधिक आराम और ऊर्जा का अनुभव होता है।
सरल और सभी के लिए उपयोगी योग दिनचर्या
इस योग प्रोटोकॉल को मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा तैयार किया गया है। इसमें केंद्रित होने के अभ्यास, कंधों और टखनों की हल्की गतिविधियां, बैठकर किए जाने वाले रीढ़ के व्यायाम, अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम तथा संक्षिप्त ध्यान शामिल हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे करने के लिए किसी विशेष उपकरण या अतिरिक्त स्थान की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह हर यात्री के लिए आसानी से अपनाने योग्य बन जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यह पांच मिनट का इन-फ्लाइट योग प्रोटोकॉल योग महोत्सव 2026 में शुरू किया गया।
- इसे मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने विकसित किया है।
- इस दिनचर्या में अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम शामिल हैं।
- इसका उद्देश्य थकान, तनाव, खराब रक्तसंचार और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस के जोखिम को कम करना है।
यह पहल दर्शाती है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े स्वास्थ्य लाभ दे सकते हैं। बढ़ती हवाई यात्राओं और व्यस्त जीवनशैली के बीच यह योग प्रोटोकॉल लोगों को यह सिखाता है कि नियमित और सरल अभ्यास के माध्यम से वे कहीं भी अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकते हैं।