हल्दिया बल्क टर्मिनल का उद्घाटन, पूर्वी समुद्री ढांचे को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स में हल्दिया बल्क टर्मिनल का उद्घाटन किया। यह आधुनिक और पूरी तरह स्वचालित ड्राई बल्क कार्गो हैंडलिंग सुविधा अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड द्वारा विकसित की गई है। यह परियोजना भारत के पूर्वी समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है और इससे हुगली नदी के मार्ग से कार्गो संचालन की क्षमता और दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है।
यह टर्मिनल कोयला सहित कई प्रकार के बल्क कार्गो के संचालन के लिए बनाया गया है, जो बिजली उत्पादन, इस्पात और एल्युमिनियम जैसे प्रमुख उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध कराता है।
हुगली नदी पर भारत की पहली पूर्ण स्वचालित ड्राई बल्क सुविधा
हल्दिया बल्क टर्मिनल की वार्षिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता लगभग 4 मिलियन मीट्रिक टन है। इसे हुगली नदी पर भारत की पहली पूरी तरह स्वचालित ड्राई बल्क कार्गो सुविधा माना जाता है।
यह टर्मिनल हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स के भीतर हुगली नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसके संचालन से पूर्वी समुद्री कॉरिडोर में कार्गो की आवाजाही को मजबूती मिलेगी और पूर्वी भारत के औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर समर्थन मिलेगा।
डीबीएफओटी मॉडल के तहत विकसित परियोजना
इस टर्मिनल को 30 वर्षों की रियायत अवधि के तहत डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण यानी डीबीएफओटी मॉडल के अंतर्गत विकसित किया गया है। इस परियोजना का निर्माण कार्य 14 जुलाई 2023 को शुरू हुआ था और इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया गया।
टर्मिनल का ड्राफ्ट लगभग 8.5 मीटर है और इसकी बर्थ लंबाई 193 मीटर है, जबकि एक्सट्रीम मूरिंग प्वाइंट 337 मीटर तक विस्तारित हैं। इस बुनियादी ढांचे के कारण बंदरगाह अब बड़े बल्क कार्गो जहाजों को अधिक कुशलता से संभाल सकेगा।
आधुनिक कार्गो हैंडलिंग प्रणाली
टर्मिनल को आधुनिक और यंत्रीकृत प्रणालियों से लैस किया गया है, जिससे कार्गो संचालन तेज और अधिक सुरक्षित हो सके। इसमें दो मोबाइल हार्बर क्रेन, दो स्टैकर-कम-रिक्लेमर, 2000 टन क्षमता वाली रेलवे वैगन लोडिंग प्रणाली, 2.10 किलोमीटर लंबी कन्वेयर प्रणाली और 1.54 किलोमीटर लंबी समर्पित रेलवे लाइन शामिल है।
इन सुविधाओं के माध्यम से जहाजों से सीधे रेलवे वैगनों में कार्गो स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे बंदरगाह पर जहाजों के ठहराव का समय कम होगा और कार्गो के तेजी से परिवहन में मदद मिलेगी।
यह एकीकृत रेल प्रणाली पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के उद्योगों तक कच्चे माल की आपूर्ति को तेज और सस्ता बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- हल्दिया बल्क टर्मिनल कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स में स्थित है।
- यह हुगली नदी पर भारत की पहली पूर्ण स्वचालित ड्राई बल्क कार्गो हैंडलिंग सुविधा है।
- इस परियोजना को अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है।
- टर्मिनल की वार्षिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता लगभग 4 मिलियन मीट्रिक टन है।
भारत के पूर्वी तट पर देश के लगभग 60 प्रतिशत ड्राई बल्क आयात होते हैं, जिनमें कोयला, बॉक्साइट और चूना पत्थर जैसी प्रमुख वस्तुएं शामिल हैं। ऐसे में हल्दिया बल्क टर्मिनल का विकास पूर्वी भारत के समुद्री व्यापार और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे बंदरगाह संचालन अधिक तेज, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनने की भी उम्मीद है।