स्वदेशी पनडुब्बी ‘नारव्हाल’ के सफल परीक्षण के साथ ताइवान ने समुद्री सुरक्षा में रचा इतिहास
ताइवान ने अपनी पहली स्वदेशी रूप से विकसित पनडुब्बी ‘नारव्हाल’ का पहला जल परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि ताइवान की सैन्य आधुनिकीकरण रणनीति का एक बड़ा मील का पत्थर है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय तनाव और चीन की नौसैनिक गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं।
स्वदेशी पनडुब्बी कार्यक्रम की ऐतिहासिक उपलब्धि
‘नारव्हाल’ ने ताइवान के दक्षिणी तट पर काओह्सिओंग बंदरगाह के पास उथले पानी में नेविगेशन परीक्षण किया। यह परीक्षण ताइवान की राज्य स्वामित्व वाली शिपबिल्डर कंपनी CSBC Corporation द्वारा संचालित किया गया। यह पनडुब्बी ताइवान द्वारा विकसित की जाने वाली आठ पनडुब्बियों की श्रृंखला की पहली इकाई है, जिसका उद्देश्य समुद्री मार्गों की रक्षा और संघर्ष की स्थिति में ‘सी डिनायल’ (Sea Denial) क्षमताओं को मजबूत करना है।
रणनीतिक पृष्ठभूमि और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
इस पनडुब्बी परियोजना में संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम सहित कई देशों की विशेषज्ञता और तकनीक का सहारा लिया गया है। यह सहयोग उस ताइवान के लिए एक उपलब्धि है जिसे चीन के दबाव के कारण कूटनीतिक रूप से अलग-थलग रखा जाता है।
चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और हाल के वर्षों में ताइवान के चारों ओर सैन्य अभ्यासों की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि की है। ताइवान के लिए पनडुब्बियाँ असिममित युद्ध रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा हैं, जो चीन की नौसैनिक संख्यात्मक और तकनीकी बढ़त का संतुलन साध सकती हैं।
क्षमताएं, लागत और देरी
‘नारव्हाल’ की अनुमानित लागत लगभग 49.36 अरब ताइवान डॉलर है। यह पनडुब्बी एक अमेरिकी रक्षा कंपनी द्वारा निर्मित कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से सुसज्जित है और इसमें अमेरिका निर्मित मार्क 48 हैवीवेट टॉरपीडो लगाए जाएंगे।
हालांकि इसका मूल रूप से 2024 में डिलीवरी होना था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और चीन के दबाव के चलते इसमें विलंब हुआ। ताइवान ने संकेत दिया है कि भविष्य की पनडुब्बियों में मिसाइल प्रणालियाँ भी जोड़ी जा सकती हैं, जिससे इसकी प्रतिरोधक क्षमता और भी मजबूत हो सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ताइवान की रणनीति असिममित युद्ध क्षमताओं पर आधारित है, जैसे कि पनडुब्बियाँ, ड्रोन और मोबाइल मिसाइलें।
- पहली स्वदेशी पनडुब्बी का नाम ‘नारव्हाल’ है, जिसे CSBC Corporation ने बनाया है।
- मार्क 48 टॉरपीडो उन्नत नौसेनाओं द्वारा उपयोग में लिए जाने वाले भारी टॉरपीडो हैं।
- चीन के पास एयरक्राफ्ट कैरियर और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियाँ मौजूद हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव और रक्षा आधुनिकीकरण
ताइवान का लक्ष्य है कि वह 2027 तक कम से कम दो स्वदेशी पनडुब्बियाँ तैनात कर सके। यह विकास उस समय हो रहा है जब चीन अपने सैन्य बलों को तेज़ी से विस्तारित कर रहा है, जिसमें स्टेल्थ फाइटर, मिसाइल बल और एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हैं।
ताइवान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह ऐसे मोबाइल और जीवित रहने योग्य हथियार प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो किसी संघर्ष की स्थिति में प्रभावी प्रतिरोध प्रदान कर सकें।
‘नारव्हाल’ का यह परीक्षण दर्शाता है कि ताइवान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच अपने सैन्य संतुलन और समुद्री सुरक्षा को मज़बूती देने के लिए पूरी तरह तैयार है।