स्पाइना बिफिडा: भारत में सबसे आम जन्म दोष और एक रोकी जा सकने वाली त्रासदी

स्पाइना बिफिडा: भारत में सबसे आम जन्म दोष और एक रोकी जा सकने वाली त्रासदी

हाल ही में झारखंड की एक युवा माँ अपने सात महीने के बच्चे, जिसकी पीठ पर एक बड़ा उभार और दोनों पैरों में लकवा था, के इलाज के लिए मदद मांगती हुई सामने आई। तमाम अस्पतालों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कभी यह नहीं बताया गया कि यह स्थिति क्या है, क्यों होती है, और इससे बचाव या इलाज संभव है। उनके बच्चे को स्पाइना बिफिडा (Spina Bifida) नामक स्थिति है — जो कि भारत में सबसे सामान्य जन्म दोष है। फिर भी इस जानकारी का परिवार तक समय पर न पहुँचना हमारी स्वास्थ्य प्रणाली की गंभीर विफलता को उजागर करता है।

स्पाइना बिफिडा क्या है और इसका प्रभाव

स्पाइना बिफिडा एक जन्मजात तंत्रिका दोष है जिसमें रीढ़ की हड्डी पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाती। इससे शारीरिक अपंगता, विशेषकर पैरों में लकवा, हो सकता है। भारत में हर वर्ष 25,000 से अधिक बच्चे इस स्थिति के साथ जन्म लेते हैं, जिससे यह विश्व के सबसे अधिक प्रभावित देशों में आता है।

इस स्थिति में लकवा हल्के कमजोरी से लेकर पूरे शरीर के निचले हिस्से की निष्क्रियता तक हो सकता है, जिससे कई बच्चे जन्म से ही व्हीलचेयर पर निर्भर हो जाते हैं। इसके साथ ही उन्हें अक्सर हाइड्रोसेफालस, मूत्र और मल नियंत्रण की समस्या, और क्लबफुट जैसे हड्डी से जुड़े विकार भी होते हैं।

इलाज की संभावनाएँ बनाम भारत की वास्तविकता

स्पाइना बिफिडा बुद्धि को प्रभावित नहीं करता। समय पर सही सर्जिकल और पुनर्वास सेवा मिल जाए तो ऐसे बच्चे स्वतंत्र और आत्मनिर्भर वयस्क बन सकते हैं। लेकिन भारत में 75% से अधिक प्रभावित बच्चों को विशेषज्ञ देखभाल नहीं मिलती। इस कारण यह एक नियंत्रण योग्य चिकित्सीय स्थिति से बदलकर आजीवन सामाजिक-आर्थिक बोझ बन जाती है।

एक रोकी जा सकने वाली त्रासदी: जानकारी और नीति की कमी

यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक इसलिए है क्योंकि स्पाइना बिफिडा को काफी हद तक रोका जा सकता है1991 में “The Lancet” में प्रकाशित एक प्रसिद्ध अध्ययन में यह साबित हो चुका है कि गर्भधारण से पहले फोलिक एसिड की नियमित खुराक 70% से अधिक मामलों को रोक सकती है।

लेकिन 30 वर्षों के बाद भी भारत में न तो कोई व्यापक जन-जागरूकता अभियान शुरू हुआ है और न ही राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर फोलिक एसिड से जुड़े खाद्य फोर्टिफिकेशन की नीति लागू हुई है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • स्पाइना बिफिडा भारत में सबसे आम जन्म दोष है।
  • गर्भधारण से पहले फोलिक एसिड की खुराक 70% से अधिक मामलों को रोक सकती है।
  • भारत में इसका प्रचलन दर लगभग 4 प्रति 1,000 जन्म है।
  • 68 देश फोलिक एसिड से खाद्य पदार्थों को फोर्टिफाई करना कानूनी रूप से अनिवार्य कर चुके हैं।

वैश्विक दृष्टिकोण और भारत के लिए आगे की राह

दुनिया भर में 68 देशों ने फोलिक एसिड फोर्टिफिकेशन को अनिवार्य किया है, जिससे स्पाइना बिफिडा के मामले 1 प्रति 1,000 जन्म से भी कम हो गए हैं। भारत में अब तक कोई प्रभावी नीति नहीं अपनाई गई है। हाल के अध्ययनों में नमक और चाय जैसे सामान्य उपभोग वाले पदार्थों के फोर्टिफिकेशन की संभावनाएँ सामने आई हैं।

एमोरी विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ विजया कंचरला समेत कई विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम की लागत जीवन भर के इलाज और पुनर्वास से कहीं कम है। जब तक भारत राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान और खाद्य फोर्टिफिकेशन नीति नहीं अपनाएगा, स्पाइना बिफिडा एक रोकी जा सकने वाली विकलांगता और पीड़ा का कारण बना रहेगा।

यह समय है कि नीतिगत हस्तक्षेप, सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा और महिला स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर इस समस्या का समाधान खोजा जाए।

Originally written on January 10, 2026 and last modified on January 10, 2026.

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