सोलर पैनल कचरे की चुनौती, भारत की सर्कुलर इकोनॉमी की ओर पहल
भारत तेजी से बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता के साथ एक नई चुनौती का सामना कर रहा है—सोलर पैनल कचरे का प्रबंधन। अनुमान है कि 2030 तक देश में सौर पैनलों से उत्पन्न कुल कचरा लगभग 600 किलो-टन तक पहुंच सकता है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) और ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद (CEEW) के अध्ययन के अनुसार, इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए प्रभावी रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
ई-वेस्ट प्रबंधन के लिए नियामक ढांचा
भारत सरकार ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के माध्यम से ई-वेस्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 अधिसूचित किए हैं। इन नियमों में सोलर फोटोवोल्टिक पैनलों को भी शामिल किया गया है, जिससे इनके सुरक्षित संग्रह, पुनर्चक्रण और निपटान की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
यह ढांचा उत्पादकों, उपभोक्ताओं और रीसाइक्लिंग एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करता है, जिससे पूरे जीवन चक्र के दौरान इलेक्ट्रॉनिक कचरे का पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन संभव हो सके।
विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) की भूमिका
केंद्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के तहत एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। इस प्रणाली के तहत उत्पादकों को अपने उत्पादों के जीवन के अंत में उनके कचरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी उठानी होती है।
यह पोर्टल कचरे के संग्रह, ट्रैकिंग और रीसाइक्लिंग को सुनिश्चित करता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। EPR प्रणाली सोलर पैनल कचरे के प्रभावी प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण उपकरण बनकर उभर रही है।
सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के प्रयास
सरकार ने सोलर ऊर्जा क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। 11 प्रमुख क्षेत्रों में सर्कुलर इकोनॉमी लागू करने के लिए समितियां गठित की गई हैं, जिनमें सोलर पैनल भी शामिल हैं।
MNRE ने सोलर तकनीकों में पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। इसके अलावा, नवाचार चुनौतियों के माध्यम से ऐसे शोध को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो सोलर मॉड्यूल और बैटरियों के टिकाऊ डिजाइन और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा दें।
रीसाइक्लिंग और महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति
भारत में सोलर पैनल रीसाइक्लिंग क्षमता विकसित करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से परियोजनाओं के प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
साथ ही, खनन मंत्रालय ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत 1500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य ई-वेस्ट और बैटरी कचरे से मूल्यवान खनिजों की पुनर्प्राप्ति करना है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ई-वेस्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में सोलर पैनलों को शामिल किया गया है।
- विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के तहत उत्पादकों को कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है।
- MNRE सोलर क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे रहा है।
- 2030 तक भारत में सोलर कचरा 600 किलो-टन तक पहुंच सकता है।
सोलर पैनल कचरे की बढ़ती समस्या भारत के लिए एक नई पर्यावरणीय चुनौती है, लेकिन इसके साथ ही यह अवसर भी प्रदान करती है कि देश सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल अपनाकर सतत विकास की दिशा में आगे बढ़े। प्रभावी नीतियों, तकनीकी नवाचार और उद्योग-शिक्षा सहयोग के माध्यम से भारत अपनी स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को और अधिक टिकाऊ बना सकता है।