सैन्य–नागरिक समन्वय की नई मिसाल: भारतीय सेना ने ‘संझा शक्ति’ अभ्यास का सफल आयोजन किया
भारतीय सेना ने ‘संझा शक्ति’ नामक एक सैन्य–नागरिक समन्वय अभ्यास का आयोजन महाराष्ट्र के दिघी हिल्स रेंज में किया। यह अभ्यास दक्षिणी कमान के अंतर्गत महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा क्षेत्र की देखरेख में आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य जटिल सुरक्षा चुनौतियों और आपातकालीन परिस्थितियों में सशस्त्र बलों और नागरिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।
उद्देश्य और संचालनिक फोकस
भारतीय सेना के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य था:
• सैन्य–नागरिक तालमेल को बेहतर बनाना
• तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया क्षमताओं को सुदृढ़ करना
• आंतरिक सुरक्षा और आपदा जैसी आपात स्थितियों में नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना
यह अभ्यास गंभीर प्राकृतिक आपदाओं, आंतरिक सुरक्षा संबंधी घटनाओं और देश के भीतरी क्षेत्रों में संभावित आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी पर केंद्रित था, जहाँ अनेक एजेंसियों के बीच समन्वित कार्यवाही अनिवार्य होती है।
भागीदारी और संयुक्त एजेंसियाँ
इस अभ्यास में 350 से अधिक कर्मियों ने भाग लिया, जिनमें भारतीय सेना के साथ-साथ 16 प्रमुख नागरिक एजेंसियाँ शामिल थीं:
• महाराष्ट्र पुलिस
• फोर्स वन
• विभिन्न अग्निशमन एवं आपात सेवा इकाइयाँ
इस व्यापक भागीदारी ने यह दर्शाया कि सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच एकीकृत योजना और निष्पादन कितना आवश्यक है।
इंटरऑपरेबिलिटी और त्वरित प्रतिक्रिया का परीक्षण
‘संझा शक्ति’ अभ्यास में वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित मिशन-उन्मुख परिदृश्यों का समावेश किया गया, जिससे विभिन्न एजेंसियों के बीच:
• इंटरऑपरेबिलिटी (पारस्परिक संगतता)
• संचार प्रोटोकॉल
• निर्णय लेने की प्रक्रिया
• त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र
की प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया। दक्षिणी कमान ने इस अभ्यास को सिविल–मिलिट्री भागीदारों के बीच समन्वय की सफल पुष्टि बताया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
• संझा शक्ति भारतीय सेना का सैन्य–नागरिक समन्वय अभ्यास है।
• यह दक्षिणी कमान के अंतर्गत आयोजित किया गया।
• इसका उद्देश्य आपदाओं और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने हेतु साझा तैयारी करना है।
• रियर एरिया सिक्योरिटी (भीतरी क्षेत्र की सुरक्षा) भारतीय सेना की एक प्रमुख भूमिका है।
नेतृत्व दृष्टिकोण और रणनीतिक महत्त्व
लेफ्टिनेंट जनरल डी एस कुशवाह, एवीएसएम, एसएम, जो महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग हैं, ने कहा कि:
“भीतरी क्षेत्रों की सुरक्षा, आपदाओं के समय त्वरित प्रतिक्रिया और पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों को समर्थन देने में सैन्य–नागरिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है।”
‘संझा शक्ति’ अभ्यास ने न केवल सेना की रियर एरिया सिक्योरिटी में भूमिका को रेखांकित किया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि भारत की सशस्त्र और नागरिक एजेंसियाँ साझा ढांचे के तहत समन्वित रूप से कार्य कर सकती हैं — जिससे देश की सुरक्षा और नागरिकों की भलाई सुनिश्चित होती है।
यह अभ्यास सुरक्षा रणनीति के बदलते स्वरूप में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है, जहाँ साझा प्रतिक्रिया तंत्र ही भविष्य की चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने की कुंजी बन सकता है।