सेलेस्टे मिशन से यूरोप की सैटेलाइट नेविगेशन क्षमता में बढ़त

सेलेस्टे मिशन से यूरोप की सैटेलाइट नेविगेशन क्षमता में बढ़त

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने सैटेलाइट नेविगेशन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ‘सेलेस्टे’ मिशन के पहले दो उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया है। यह लॉन्च न्यूज़ीलैंड से रॉकेट लैब के इलेक्ट्रॉन रॉकेट के माध्यम से किया गया, जो यूरोप की उन्नत और विश्वसनीय नेविगेशन प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सेलेस्टे मिशन और लॉन्च विवरण

सेलेस्टे मिशन के तहत दो उपग्रह—सेलेस्टे IOD-1 और IOD-2—का प्रक्षेपण 28 मार्च 2026 को किया गया। प्रक्षेपण के लगभग एक घंटे बाद ये उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित हो गए। इनका निर्माण जीएमवी और थेल्स एलेनिया स्पेस द्वारा किया गया है। वर्तमान में ये उपग्रह अपनी प्रारंभिक संचालन अवस्था में हैं, जहां उन्हें पूर्ण रूप से सक्रिय करने की प्रक्रिया चल रही है।

गैलीलियो प्रणाली को सहयोग देने का उद्देश्य

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यूरोप की मौजूदा गैलीलियो नेविगेशन प्रणाली को एक अतिरिक्त परत प्रदान करना है। गैलीलियो उपग्रह मध्यम पृथ्वी कक्षा (MEO) में कार्य करते हैं, जबकि सेलेस्टे उपग्रह निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में संचालित होंगे। पृथ्वी के करीब होने के कारण ये उपग्रह अधिक मजबूत सिग्नल, बेहतर सटीकता और अधिक विश्वसनीय सेवाएं प्रदान करेंगे।

तकनीकी नवाचार और फ्रीक्वेंसी उपयोग

सेलेस्टे मिशन के माध्यम से नई तकनीकों, सिग्नलों और सेवाओं का परीक्षण किया जाएगा। ये उपग्रह एल-बैंड और एस-बैंड फ्रीक्वेंसी पर कार्य करेंगे, जो अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के मानकों के अनुरूप हैं। यह मिशन “न्यू स्पेस” दृष्टिकोण को अपनाता है, जिससे उपग्रहों का तेजी से और लचीले ढंग से प्रक्षेपण संभव हो पाता है।

भविष्य की योजनाएं और उपयोग

इस मिशन के तहत 2027 तक कुल 11 उपग्रहों का समूह विकसित करने की योजना है। सेलेस्टे प्रणाली का उपयोग स्वचालित वाहनों, विमानन, समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। यह परियोजना यूरोप की तकनीकी स्वतंत्रता को मजबूत करने और वैश्विक नेविगेशन प्रणाली में उसकी स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायक होगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) यूरोप के अंतरिक्ष मिशनों का संचालन करती है।
  • गैलीलियो यूरोप की वैश्विक नेविगेशन सैटेलाइट प्रणाली है, जो GPS के समान है।
  • निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) के उपग्रह पृथ्वी के अधिक निकट होते हैं।
  • एल-बैंड और एस-बैंड फ्रीक्वेंसी का उपयोग सैटेलाइट संचार और नेविगेशन में किया जाता है।

अंततः, सेलेस्टे मिशन यूरोप के लिए न केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक है, बल्कि यह भविष्य की नेविगेशन प्रणालियों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। इससे वैश्विक स्तर पर सटीक और विश्वसनीय सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी।

Originally written on April 1, 2026 and last modified on April 1, 2026.

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