“सेम्मोज़ि इलक्किय विरुधु”: तमिलनाडु सरकार द्वारा नई राष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कार योजना की घोषणा
तमिलनाडु सरकार ने भारतीय साहित्यिक जगत में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने चेन्नई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के समापन समारोह में एक नई राज्य प्रायोजित साहित्यिक पुरस्कार योजना की घोषणा की। इस पुरस्कार का नाम है “सेम्मोज़ि इलक्किय विरुधु” (शुद्ध भाषा साहित्य पुरस्कार), जो हिंदी को छोड़कर अन्य प्रमुख भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों को सम्मानित करेगा।
“सेम्मोज़ि इलक्किय विरुधु” की विशेषताएँ
यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष दिया जाएगा और इसका स्वरूप राष्ट्रीय स्तर का होगा। प्रत्येक भाषा में चुनी गई उत्कृष्ट कृति के लेखक को ₹5 लाख की नकद राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुरस्कार भाषाई सीमाओं से परे साहित्यिक उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए शुरू किया गया है।
पहले चरण में शामिल भाषाएँ
इस पुरस्कार के पहले चरण में सात भारतीय भाषाओं को शामिल किया गया है:
- तमिल
- तेलुगु
- कन्नड़
- मलयालम
- ओड़िया
- बंगाली
- मराठी
इन भाषाओं का चयन उनके प्राचीन और समृद्ध साहित्यिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। भविष्य में इस पुरस्कार का दायरा और भी भाषाओं तक बढ़ाया जा सकता है।
UPSC प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- सेम्मोज़ि इलक्किय विरुधु तमिलनाडु सरकार द्वारा शुरू किया गया एक राज्य प्रायोजित साहित्यिक पुरस्कार है।
- हर भाषा के लिए पुरस्कार राशि ₹5 लाख है।
- पहले चरण में 7 भाषाएँ शामिल हैं।
- चयन प्रक्रिया स्वतंत्र विशेषज्ञ समितियों द्वारा संचालित होगी, जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
साहित्यिक स्वायत्तता को लेकर चिंता
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा में हुई देरी और उसमें कथित केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के हस्तक्षेप की आलोचना की। उन्होंने इसे रचनात्मक स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया और कहा कि साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इस विषय पर राज्य सरकार से रचनात्मक समाधान की अपील की थी।
स्वतंत्र चयन प्रक्रिया
तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस पुरस्कार की केवल संरक्षक (patron) की भूमिका निभाएगी और चयन पूरी तरह स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति के माध्यम से होगा। प्रत्येक भाषा के लिए अलग-अलग प्रतिष्ठित लेखकों की समिति बनाई जाएगी ताकि राजनीतिक हस्तक्षेप से बचा जा सके और साहित्य की गुणवत्ता बनी रहे।
निष्कर्ष
“सेम्मोज़ि इलक्किय विरुधु” तमिलनाडु सरकार की ओर से एक दूरदर्शी और समावेशी पहल है, जो भारतीय भाषाओं के बहुभाषी साहित्य को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल रचनात्मक स्वतंत्रता की रक्षा करती है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता को भी मजबूत करती है।