सेब के पत्तों से जंगरोधी सुरक्षा: भारत-चीन अनुसंधान सहयोग की हरित रसायन में नई उपलब्धि

सेब के पत्तों से जंगरोधी सुरक्षा: भारत-चीन अनुसंधान सहयोग की हरित रसायन में नई उपलब्धि

भारत और चीन की विश्वविद्यालयों के संयुक्त अनुसंधान प्रयास ने धातुओं को जंग से बचाने का एक सतत और पर्यावरण-अनुकूल तरीका खोजा है, जिसमें अपशिष्ट सेब के पत्तों का उपयोग किया गया है। यह खोज पारंपरिक विषैले रासायनिक इनहिबिटरों के विकल्प के रूप में हरित रसायन (Green Chemistry) की संभावनाओं को उजागर करती है और औद्योगिक संरचनाओं में पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भारत-चीन शैक्षणिक सहयोग की पहल

यह अध्ययन नागालैंड विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी बीजिंग के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया। प्रो. अम्ब्रिश सिंह और प्रो. युजी किआंग के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय टीम ने फेंक दिए गए सेब के पत्तों से उच्च-प्रदर्शन वाले जंगरोधी कार्बन क्वांटम डॉट्स तैयार किए। यह सहयोग इस बात का सशक्त उदाहरण है कि कैसे सीमापार शैक्षणिक भागीदारियाँ वैश्विक औद्योगिक समस्याओं का समाधान सतत विज्ञान के माध्यम से कर सकती हैं।

एप्पल-लीफ कार्बन क्वांटम डॉट्स: तकनीकी समझ

वैज्ञानिकों ने हरित हाइड्रोथर्मल प्रक्रिया द्वारा सेब के पत्तों से नैनो-स्तरीय कार्बन क्वांटम डॉट्स विकसित किए, जो नाइट्रोजन और सल्फर से युक्त होते हैं। इनकी सतह पर सक्रिय साइट्स की बहुलता होती है, जो धातु की सतह से मजबूती से चिपक कर जंग की प्रक्रिया को रोकती हैं। प्रयोगशाला परीक्षणों में इन डॉट्स ने अम्लीय परिस्थितियों में तांबे की जंग को 94% से 96.2% तक प्रभावी ढंग से रोका, वो भी कम सांद्रता और लंबे समय तक संपर्क के बावजूद।

औद्योगिक और पर्यावरणीय महत्व

जंग की समस्या तेल एवं गैस, ऊर्जा उत्पादन, रासायनिक प्रसंस्करण और अपशिष्ट जल शोधन जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर है। यह अध्ययन दर्शाता है कि सेब के पत्तों से तैयार जैव-आधारित इनहिबिटर तांबे की सतह पर एक सघन और स्थिर सुरक्षात्मक परत बनाते हैं, जिससे संक्षारक आयनों का संचरण रुकता है। इससे पाइपलाइनों, टैंकों और औद्योगिक उपकरणों की उम्र में वृद्धि होती है और साथ ही परंपरागत रसायनों से होने वाले पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिमों में भी कमी आती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कार्बन क्वांटम डॉट्स नैनो-स्तर के कार्बन-आधारित कण होते हैं जिनमें सक्रिय सतही समूह होते हैं।
  • संक्षारण अवरोधक (corrosion inhibitors) धातुओं को अम्लीय या कठोर पर्यावरणीय परिस्थितियों में नष्ट होने से बचाते हैं।
  • वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल कृषि अपशिष्ट को मूल्यवान उत्पादों में बदलने की अवधारणा को बढ़ावा देता है।
  • ग्रीन केमिस्ट्री का उद्देश्य औद्योगिक प्रक्रियाओं में विषैले रसायनों की मात्रा को कम करना है।

निष्कर्ष

यह शोध न केवल पर्यावरणीय सुरक्षा की दिशा में एक नवाचार है, बल्कि यह कृषि अपशिष्ट से मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण की आर्थिक संभावना भी प्रस्तुत करता है। भविष्य में यह तकनीक किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है। यद्यपि अभी यह अध्ययन प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित है, परंतु निकट भविष्य में इसके पायलट स्तर पर परीक्षण और औद्योगिक कार्यान्वयन की योजना है। यह शोध भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों की वैश्विक बुनियादी ढांचा विकास में सतत तकनीक के योगदान को रेखांकित करता है।

Originally written on January 20, 2026 and last modified on January 20, 2026.

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