सेना दिवस 2026: भारत की मिसाइल शक्ति और सामरिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक

सेना दिवस 2026: भारत की मिसाइल शक्ति और सामरिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक

हर वर्ष 15 जनवरी को भारत सेना दिवस के रूप में मनाता है, जो 1949 में फील्ड मार्शल के. एम. करिअप्पा के पहले भारतीय सेना प्रमुख बनने की ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है। इस अवसर पर भारतीय सेना की बहादुरी, अनुशासन और बलिदान को श्रद्धांजलि दी जाती है। वर्ष 2026 के सेना दिवस पर देश का ध्यान उस मिसाइल शक्ति की ओर केंद्रित है, जो भारत की रणनीतिक सुरक्षा और आत्मनिर्भर सैन्य प्रणाली का मूल आधार बन चुकी है।

सेना दिवस और रणनीतिक संदर्भ

सेना दिवस केवल एक प्रतीकात्मक दिन नहीं, बल्कि यह उस संगठन की शक्ति और प्रतिबद्धता का उत्सव है जो सीमाओं की रक्षा करता है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भारत की मिसाइल क्षमताएँ न केवल आक्रामकता का उत्तर देने में सक्षम हैं, बल्कि प्रामाणिक न्यूनतम प्रतिरोध नीति (Credible Minimum Deterrence) को मजबूती भी प्रदान करती हैं। जल, थल और नभ – तीनों क्षेत्रों में मिसाइलों की पहुँच और सटीकता भारत की सुरक्षा रणनीति की धुरी बन चुकी है।

दीर्घ दूरी की सामरिक मिसाइल प्रणालियाँ

भारत की रणनीतिक प्रतिरोध प्रणाली का प्रमुख आधार अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किमी से अधिक है। इसमें MIRV तकनीक (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicles) के माध्यम से एक साथ कई लक्ष्यों पर प्रहार करने की क्षमता है।

इसका नया संस्करण, अग्नि-प्राइम, मध्यम दूरी के लिए विकसित की गई मिसाइल है जिसकी रेंज 1,000–2,000 किमी है। इसे कैनिस्टर में रखा जा सकता है, जिससे यह युद्धकालीन त्वरित तैनाती और उच्चतम उत्तरजीविता की सुविधा देती है।

क्रूज मिसाइलें और सटीक प्रहार क्षमता

भारत और रूस के सहयोग से विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत की अग्रणी सटीक प्रहार प्रणाली है। इसका विस्तारित संस्करण 800 किमी तक की रेंज के साथ जल्द ही सेवा में शामिल होने वाला है। यह ज़मीन, समुद्र और वायु — तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है।

इसके अतिरिक्त, निर्भय सबसोनिक क्रूज मिसाइल भारत को दुश्मन की गहराई में स्थित कमांड सेंटरों और महत्वपूर्ण ढांचों को चुपचाप और सटीकता से निशाना बनाने की क्षमता देती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है, जब 1949 में जनरल के. एम. करिअप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ बने।
  • अग्नि-5 भारत की सबसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो परमाणु प्रतिरोध की रीढ़ है।
  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी तैनाती थल, जल और वायु तीनों माध्यमों से संभव है।
  • भारत की रक्षा नीति ‘प्रामाणिक न्यूनतम प्रतिरोध’ के सिद्धांत पर आधारित है।

वायु, नौसैनिक और रक्षा प्रणाली

वायुसेना के लिए अस्त्र Mk-1 और Mk-2 मिसाइलें दूरस्थ लक्ष्य भेदने वाली एयर-टू-एयर मिसाइलें हैं, जिनकी मारक क्षमता क्रमशः 110 किमी और 160 किमी तक है। ये वायु युद्ध क्षमता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाती हैं।

समुद्री क्षेत्र में भारत की K-15 सागरिका पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जो द्वितीय प्रहार क्षमता (second-strike capability) को सुनिश्चित करती है। यह भारत की समुद्र आधारित प्रतिरोध नीति की महत्वपूर्ण कड़ी है।

वहीं आकाश प्राइम स्वदेशी सतह-से-हवा मिसाइल प्रणाली है जो 360-डिग्री रक्षा कवच प्रदान करती है। यह प्रणाली दुश्मन के विमानों, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से महत्वपूर्ण ठिकानों की रक्षा करती है।

भारत की मिसाइल प्रणाली सेना दिवस पर देश को यह याद दिलाती है कि सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकसित रणनीति से सुनिश्चित होती है। इन मिसाइल प्रणालियों के माध्यम से भारत ने न केवल अपनी सुरक्षा को मज़बूत किया है बल्कि वैश्विक सैन्य तकनीक में भी एक सशक्त उपस्थिति दर्ज की है।

Originally written on January 15, 2026 and last modified on January 15, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *