सूर्य से निकली 2026 की सबसे शक्तिशाली सौर ज्वाला: पृथ्वी पर रेडियो संचार प्रभावित, वैज्ञानिक सतर्क

सूर्य से निकली 2026 की सबसे शक्तिशाली सौर ज्वाला: पृथ्वी पर रेडियो संचार प्रभावित, वैज्ञानिक सतर्क

सूर्य ने 2026 की अब तक की सबसे तीव्र सौर ज्वाला (Solar Flare) को जारी करते हुए वैज्ञानिकों को उच्चतम सतर्कता की स्थिति में पहुँचा दिया है। बीते 24 घंटों में सूर्य से कई शक्तिशाली सौर ज्वालाएं फूटीं, जिनमें X8.3 श्रेणी की एक अत्यंत तीव्र ज्वाला शामिल है। इसने प्रशांत क्षेत्र के कुछ हिस्सों में रेडियो संचार को क्षणिक रूप से बाधित किया और वर्तमान सौर चक्र की बढ़ती अस्थिरता को उजागर किया।

सौर ज्वाला क्या होती है?

सौर ज्वालाएं सूर्य की सतह से अचानक, विस्फोटक रूप से ऊर्जा का उत्सर्जन होती हैं, जो उसके चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती हैं। इनकी शक्ति को पाँच श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है — A, B, C, M, और X, जिनमें X श्रेणी सबसे अधिक तीव्र होती है। प्रत्येक स्तर में ऊर्जा की मात्रा दस गुना बढ़ती है। X श्रेणी की ज्वालाएं पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल, उपग्रहों और संचार प्रणालियों को प्रभावित करने में सक्षम होती हैं।

X8.3 श्रेणी की ज्वाला क्यों महत्वपूर्ण है?

X8.3 श्रेणी की यह सौर ज्वाला हाल के वर्षों में दर्ज की गई सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक है। यह 1 फरवरी को शाम 6:57 बजे EST पर अपने चरम पर पहुंची और इसमें तीव्र पराबैंगनी तथा एक्स-रे विकिरण उत्सर्जित हुआ। इस विकिरण ने पृथ्वी के आयनमंडल को प्रभावित किया, जिससे दक्षिण प्रशांत के कुछ हिस्सों में R3-स्तर का रेडियो ब्लैकआउट हुआ और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में शॉर्टवेव रेडियो संकेत बाधित हुए।

सौर गतिविधि का स्रोत: सनस्पॉट क्षेत्र 4366

यह तीव्र सौर गतिविधि सनस्पॉट क्षेत्र 4366 से उत्पन्न हुई, जो हाल के दिनों में तेज़ी से बढ़ा है और इसमें अस्थिर चुम्बकीय व्यवहार देखा गया है। यह अस्थिरता बड़ी सौर ज्वालाओं का प्रमुख कारण होती है। NOAA के स्पेस वेदर प्रीडिक्शन सेंटर के अनुसार, यह सनस्पॉट अब पृथ्वी की दिशा में घूम रहा है, जिससे आगे और अधिक सौर घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • X श्रेणी की सौर ज्वालाएं सबसे अधिक तीव्र होती हैं।
  • प्रत्येक श्रेणी में ऊर्जा की तीव्रता लगभग दस गुना बढ़ती है।
  • सौर ज्वालाएं पृथ्वी के आयनमंडल को प्रभावित करती हैं, न कि निचले वायुमंडल को।
  • सनस्पॉट सूर्य की सतह पर अपेक्षाकृत ठंडे और चुम्बकीय रूप से सक्रिय क्षेत्र होते हैं।

पृथ्वी पर संभावित प्रभाव और आगे की चेतावनियाँ

वैज्ञानिक अब यह मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्या इन सौर ज्वालाओं के साथ कोरोनल मास इजेक्शन (CME) भी हुआ है। शुरुआती आकलनों के अनुसार अधिकांश सौर पदार्थ पृथ्वी को सीधे प्रभावित नहीं करेगा, हालांकि 5 फरवरी के आसपास एक मामूली प्रभाव की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। यदि ऐसा हुआ, तो भूचुम्बकीय गतिविधि में हल्की वृद्धि हो सकती है और उच्च अक्षांश क्षेत्रों में ऑरोरा (Northern Lights) देखे जा सकते हैं।

सनस्पॉट क्षेत्र 4366 के सक्रिय बने रहने के चलते अगले कुछ दिनों में और अधिक सौर ज्वालाओं की संभावना व्यक्त की जा रही है। वैज्ञानिकों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है ताकि पृथ्वी पर इसके प्रभावों को समय रहते समझा और नियंत्रित किया जा सके।

Originally written on February 3, 2026 and last modified on February 3, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *