सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 2026: पारंपरिक कला और वैश्विक संस्कृति का संगम
फरीदाबाद, हरियाणा में सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले का 39वां संस्करण बड़ी धूमधाम से आयोजित हो रहा है। पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और क्षेत्रीय व्यंजनों की बहुरंगी झलक के साथ यह मेला बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित कर रहा है। यह वार्षिक आयोजन न केवल भारतीय शिल्पकारों के लिए प्रमुख मंच बन चुका है, बल्कि वैश्विक साझेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक भी है।
थीम और भागीदार राज्य
इस वर्ष मेले की थीम “वोकल टू ग्लोबल” रखी गई है, जो भारत के स्थानीय शिल्प को वैश्विक मंच पर ले जाने की भावना को दर्शाती है। उत्तर प्रदेश और मेघालय को इस बार थीम राज्य के रूप में चुना गया है। ये राज्य अपनी विशिष्ट लोक कलाओं, सांस्कृतिक परंपराओं और पारंपरिक व्यंजनों के साथ मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिस्र (Egypt) को इस बार पार्टनर देश बनाया गया है, जिससे मेले में वैश्विक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की झलक भी देखने को मिल रही है।
आत्मनिर्भरता की ओर शिल्पकारों का सफर
हरियाणा पर्यटन निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पार्थ गुप्ता ने आकाशवाणी से बातचीत में बताया कि यह मेला ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच को साकार करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मंच भारत और विदेशों से आए शिल्पकारों को सीधे अपने उत्पाद दिखाने और बेचने का अवसर देता है। कई ऐसे कारीगर भी शामिल हैं जो पीढ़ियों से अपने पारंपरिक शिल्प को जीवित रखे हुए हैं।
सांस्कृतिक अनुभव और दर्शकों के लिए आकर्षण
मेले में दर्शकों को एक समग्र सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होता है। 20 से अधिक भारतीय राज्यों से आए शिल्पकार अपने हस्तशिल्प जैसे वस्त्र, मिट्टी के बर्तन, धातु शिल्प, लकड़ी की कारीगरी और चित्रकला के नमूने प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजन भी मेले का खास आकर्षण हैं, जिन्हें क्षेत्रीय रसोइयों द्वारा परोसा जा रहा है। लोक नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों को भारत की विविध संस्कृति में डुबो देते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला हर साल हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित होता है।
- 2026 मेले की थीम “Vocal to Global” है।
- उत्तर प्रदेश और मेघालय इस बार के थीम राज्य हैं, जबकि मिस्र को पार्टनर देश के रूप में आमंत्रित किया गया है।
- यह मेला भारत की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है।
मेले में सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। स्वच्छता, व्हीलचेयर पहुंच और एंबुलेंस सेवाओं की व्यवस्था की गई है ताकि सभी दर्शकों और शिल्पकारों को एक सुरक्षित और समावेशी वातावरण मिल सके। सूरजकुंड मेला न केवल कला का उत्सव है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत चित्रण भी है।