सूपर्णिका नदी प्रदूषण: एनजीटी ने कर्नाटक को सख्त कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की दक्षिण क्षेत्रीय पीठ, चेन्नई ने कर्नाटक के अधिकारियों को सूपर्णिका नदी में अपशिष्ट जल के प्रवाह को रोकने के लिए एक व्यापक कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश लंबे समय से एक प्रमुख तीर्थ स्थल कोल्लूर के पास नदी प्रदूषण की शिकायतों के संदर्भ में जारी किया गया है। अगली सुनवाई की तिथि 9 फरवरी, 2026 निर्धारित की गई है।
एनजीटी की पीठ द्वारा दिए गए निर्देश
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति पुष्पा सत्यनारायण और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. प्रशांत गर्गवा की पीठ ने उडुपी की उपायुक्त स्वरूपा टी. के. और कर्नाटक शहरी जल आपूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड (KUWSDB) के अध्यक्ष को एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
इस रिपोर्ट में निम्नलिखित बातें स्पष्ट रूप से होनी चाहिए:
- उपचारात्मक उपायों का विवरण
- अनुमानित लागत
- निर्धारित समय-सीमा
- अपशिष्ट जल के नदी में प्रवाह को रोकने की रणनीति
कोल्लूर मंदिर नगर के पास प्रदूषण की शिकायतें
यह मामला कोल्लूर के सामाजिक कार्यकर्ता हरीश तोलार द्वारा दायर याचिका से उत्पन्न हुआ है, जिनका आरोप है कि श्री मूकांबिका मंदिर के आसपास स्थित लॉज और होटलों से बिना उपचारित सीवेज नदी में छोड़ा जा रहा है।
2015 से 2020 के बीच लगभग ₹19.97 करोड़ की लागत से अंडरग्राउंड सीवरेज स्कीम (UGSS) लागू की गई थी, लेकिन इसके बावजूद सूपर्णिका नदी में प्रदूषण की स्थिति जारी रही।
रिपोर्ट में कमियों पर एनजीटी की आपत्ति
NGT ने कहा कि 25 नवंबर, 2025 को उडुपी प्रशासन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट अधूरी थी। इसमें निम्नलिखित जानकारियों का अभाव था:
- प्रतिदिन उत्पन्न अपशिष्ट जल की मात्रा
- वर्तमान यूजीएसएस की वहन क्षमता
- अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता
- लागत और क्रियान्वयन की समय-सीमा
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यप्रणाली पर स्पष्ट जानकारी
इस पर NGT ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपायुक्त और KUWSDB अध्यक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना NGT अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी।
- सूपर्णिका नदी, कर्नाटक के उडुपी जिले के कोल्लूर क्षेत्र से होकर बहती है।
- UGSS का अर्थ है अंडरग्राउंड सीवरेज स्कीम, जो शहरी क्षेत्रों में सीवेज प्रबंधन के लिए है।
- कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राज्य स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण कानूनों को लागू करता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सार्वजनिक चिंता
NGT ने कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह भी निर्देश दिया है कि वे प्रदूषण फैलाने वाले संस्थानों की पहचान करें और उनके विरुद्ध कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
याचिकाकर्ता हरीश तोलार का कहना है कि सीवेज प्रदूषण के कारण नदी की जल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और श्रद्धालुओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सीवरेज अवसंरचना होने के बावजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठान नदी में अवैध रूप से गंदा जल छोड़ते हैं।
यह मामला दर्शाता है कि धार्मिक स्थलों और पर्यावरणीय संरक्षण के संतुलन के लिए प्रभावी नीति और निगरानी कितनी आवश्यक है। NGT का यह हस्तक्षेप न केवल पर्यावरणीय संरक्षण को बल देता है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की भी आवश्यकता को रेखांकित करता है।