सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड को सरंडा वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड को सरंडा वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को सरंडा गेम सैंक्चुअरी से “सरंडा वन्यजीव अभयारण्य” के रूप में अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 90 दिनों के भीतर पूरा करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य भारत के सबसे समृद्ध साल वन क्षेत्रों में से एक की पारिस्थितिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और वहां रहने वाले आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना है।

अधिसूचना और न्यायालय का निर्देश

अदालत ने स्पष्ट किया कि 1968 में तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को अब झारखंड सरकार को लागू करना होगा। पूर्व में राज्य सरकार ने बड़े क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की प्रतिबद्धता दिखाई थी, जिसे बाद में घटा दिया गया। इस असंगति पर न्यायालय ने हस्तक्षेप किया और पर्यावरणीय संरक्षण तथा विकास के बीच संतुलन पर बल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अभयारण्य की सीमाओं के भीतर या उससे एक किलोमीटर की परिधि में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं की जाएगी।

सरंडा वन का पारिस्थितिक महत्व

सरंडा वन भारत के सबसे सघन साल वनों में से एक है, जहाँ 23 स्तनधारी और 138 पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें एशियाई हाथी, चार-सींग वाला मृग, माउस डियर और स्लॉथ बेयर जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ शामिल हैं। लगभग 70% वन आवरण अब भी अक्षुण्ण है, जो इसे एशिया के प्रमुख साल वनों में स्थान देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र की जैव विविधता देश की पारिस्थितिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आदिवासी अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा

सरंडा क्षेत्र हो, मुंडा, उरांव और अन्य आदिवासी समुदायों का पारंपरिक निवास स्थल है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस अधिसूचना से किसी भी व्यक्ति या समुदाय के वनाधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। यह क्षेत्र पंचम अनुसूची के अंतर्गत आता है और यहाँ PESA अधिनियम लागू है, जो ग्राम सभाओं को स्थानीय निर्णयों में प्रमुख अधिकार देता है। विशेषज्ञों ने कहा कि संरक्षण और सामाजिक न्याय के संतुलन के लिए इन समुदायों के अधिकारों की मान्यता अत्यंत आवश्यक है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सरंडा वन का कुल क्षेत्रफल: 31,468.25 हेक्टेयर (1968 बिहार अधिसूचना अनुसार)।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इसे 90 दिनों में वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का आदेश दिया है।
  • अभयारण्य और उसके एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
  • वन में 23 स्तनधारी और 138 पक्षी प्रजातियाँ निवास करती हैं, जिनमें एशियाई हाथी प्रमुख है।

संरक्षण और भविष्य की संभावनाएँ

सुप्रीम कोर्ट की यह पहल न केवल जैव विविधता संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश के पर्यावरणीय प्रशासन में पारदर्शिता की दिशा में भी कदम है। अदालत ने झारखंड सरकार की असंगत नीतियों पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि अभयारण्य की सीमाओं को घटाने के प्रस्तावों से वन की पारिस्थितिक अखंडता को खतरा था। अब इस आदेश से बेहतर निगरानी, कानूनी सुरक्षा और परंपरागत वन प्रबंधन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Originally written on November 15, 2025 and last modified on November 15, 2025.

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