सुनाबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य: माओवाद मुक्त क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या में वृद्धि

सुनाबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य: माओवाद मुक्त क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या में वृद्धि

ओडिशा के नुआपाड़ा ज़िले में स्थित सुनाबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य में माओवादी गतिविधियों के समाप्त होने के बाद तेंदुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह क्षेत्र लगभग 600 वर्ग किमी में फैला है और प्रस्तावित टाइगर रिजर्व भी है।

हालिया सर्वेक्षण से प्रमुख जानकारी:

  • 70 से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी के संकेत मिले हैं।
  • लगाए गए 90% कैमरा ट्रैप्स में तेंदुए की तस्वीरें या निशान कैद हुए।
  • मानव–तेंदुआ संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि, आबादी के स्थायित्व का संकेत।

तेंदुए क्यों फल-फूल रहे हैं?

  • माओवादी खतरे की समाप्ति के बाद पहली बार सभी क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए जा सके।
  • शिकार की संख्या में वृद्धि:
    • हिरण
    • चौसिंगा (चार सींग वाला मृग)
    • जंगली सूअर
    • गौर (भारतीय बाइसन)
  • वन प्रबंधन और मानव हस्तक्षेप में कमी से तेंदुओं को अनुकूल आवास मिला।

UPSC प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण बिंदु:

  • स्थान: सुनाबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य, नुआपाड़ा ज़िला, ओडिशा
  • क्षेत्रफल: लगभग 600 वर्ग किमी
  • स्थिति: प्रस्तावित टाइगर रिजर्व
  • चुनौती: वर्षों तक माओवादी प्रभाव (2009 से)
  • पर्यावरणीय संपर्क: उदंती वन्यजीव अभयारण्य, छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ

बाघों की क्या स्थिति है?

  • 2016 राज्य जनगणना में 4 बाघ मिले थे।
  • 2023 राष्ट्रीय रिपोर्ट में कोई बाघ नहीं मिला
  • अब जब सुरक्षा सुधरी है, विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बाघों की वापसी संभव है।

व्यापक महत्व:

सुनाबेड़ा का यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे सुरक्षा, वैज्ञानिक निगरानी, और आवास संरक्षण वन्यजीव संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। इस क्षेत्र की पुनर्बहाली अन्य संघर्ष-प्रभावित अभयारण्यों के लिए प्रेरणा बन सकती है।

Originally written on February 2, 2026 and last modified on February 2, 2026.

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