सीमा से परेड तक: सिमरन बाला ने रचा गणतंत्र दिवस 2026 में इतिहास
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर एक ऐतिहासिक क्षण सामने आया, जब जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की रहने वाली सिमरन बाला, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की सहायक कमांडेंट के रूप में संपूर्ण पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए कर्तव्य पथ पर मार्च करती दिखीं। यह उपलब्धि सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि समस्त सीमा क्षेत्रों के युवाओं और खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई है।
नौशेरा की सीमा से राष्ट्रीय पहचान तक
राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर से ताल्लुक रखने वाली सिमरन बाला ने संघर्ष, अस्थिरता और सीमांत जीवन को अपनी प्रेरणा बनाया। लाइन ऑफ कंट्रोल के निकट पले-बढ़े इस युवा अधिकारी की देश सेवा की आकांक्षा ने उन्हें CRPF में कमीशन्ड अधिकारी के रूप में पहला स्थान दिलाया। वे राजौरी से इस पद तक पहुँचने वाली पहली महिला अधिकारी बन चुकी हैं।
गणतंत्र दिवस की ऐतिहासिक पहली
CRPF की महिला अधिकारी इससे पहले भी गणतंत्र दिवस परेड में टुकड़ियों का नेतृत्व कर चुकी हैं, लेकिन 2026 में सिमरन बाला ने एक विशेष कीर्तिमान स्थापित किया। वे पहली महिला बनीं जिन्होंने 140 से अधिक पुरुष जवानों की CRPF टुकड़ी का नेतृत्व किया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत की सुरक्षा संस्थाओं में महिलाओं को अब नेतृत्व की मुख्यधारा में स्थान मिल रहा है।
परिवार, अनुशासन और सेवा की परंपरा
सिमरन बाला की इस यात्रा के पीछे अनुशासन, आत्म-निष्ठा और परिवार का मजबूत समर्थन रहा है। उनके परिवार की यह तीसरी पीढ़ी है जो वर्दीधारी सेवा में कार्यरत है। उनके आत्मविवेकी और केंद्रित स्वभाव ने उन्हें नेतृत्व की उस ऊँचाई तक पहुँचाया, जिसे अब पूरे देश ने पहचाना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CRPF भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- कर्तव्य पथ, पूर्व में राजपथ कहलाता था, जहाँ हर साल गणतंत्र दिवस परेड आयोजित होती है।
- राजौरी जिला, जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल के निकट स्थित एक संवेदनशील क्षेत्र है।
- 2026 में भारत ने अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाया।
सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए प्रेरणा का प्रतीक
कर्तव्य पथ पर सिमरन बाला का नेतृत्व एक सामान्य औपचारिक सम्मान से कहीं अधिक है। यह उन युवाओं, विशेषकर सीमावर्ती और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों की लड़कियों, के लिए एक प्रेरक संदेश है कि शिक्षा, अनुशासन और समर्पण से हर ऊँचाई को छुआ जा सकता है।
उनकी यह यात्रा सिर्फ व्यक्तिगत गौरव की नहीं, बल्कि समाज में बदलाव और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।