सीएसआईआर-एनपीएल में पर्यावरण और सौर मापन की दो वैश्विक प्रयोगशालाओं का उद्घाटन
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज सीएसआईआर–राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के 80वें स्थापना दिवस के अवसर पर दो विश्वस्तरीय वैज्ञानिक सुविधाओं का उद्घाटन किया। इन उद्घाटनों को भारत की पर्यावरणीय शासन प्रणाली और सौर ऊर्जा मापन क्षमताओं में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। नई सुविधाएं भारत को सटीक, विश्वसनीय और देश-विशिष्ट मापन मानकों के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित करती हैं।
पर्यावरण और सौर मापन में वैश्विक उपलब्धि
मंत्री ने विश्व की दूसरी राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला और विश्व की पांचवीं राष्ट्रीय प्राथमिक सौर सेल अंशांकन सुविधा का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण मानक प्रयोगशाला भारत की पर्यावरणीय निगरानी और नियमन व्यवस्था में एक निर्णायक छलांग है, जबकि सौर सेल अंशांकन सुविधा भारत को सौर मेट्रोलॉजी के वैश्विक विशिष्ट समूह में स्थान दिलाती है। इन प्रयोगशालाओं से मापन की सटीकता और अंतरराष्ट्रीय अनुरूपता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सीएसआईआर-एनपीएल की ऐतिहासिक भूमिका
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों को 20वीं और 21वीं सदी के स्मारक बताते हुए सीएसआईआर–राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला की विशिष्ट विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व स्थापित यह प्रयोगशाला स्वतंत्र भारत की वैज्ञानिक संरचना की आधारशिला बनी। सीएसआईआर के अंतर्गत आने वाली 37 प्रयोगशालाओं में एनपीएल सबसे शुरुआती संस्थानों में से एक है। मंत्री ने स्मरण कराया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे राष्ट्रीय नेताओं का मार्गदर्शन इस संस्थान को प्राप्त रहा, जहां इतिहास और विज्ञान का अनूठा संगम दिखाई देता है।
भारतीय मानक समय और जनसरोकार
मंत्री ने बताया कि दशकों तक भारत का भारतीय मानक समय एनपीएल में स्थित परमाणु घड़ी के माध्यम से समन्वित किया जाता रहा। यह योगदान भले ही शांत और अदृश्य रहा हो, लेकिन इसने पूरे देश के दैनिक जीवन को एकसूत्र में बांधे रखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनपीएल जैसे संस्थानों को विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया जाना चाहिए, ताकि वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवाचार आधारित सोच को प्रोत्साहन मिल सके।
पर्यावरणीय शासन और सौर क्षेत्र को मजबूती
नई राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला भारतीय जलवायु परिस्थितियों में वायु प्रदूषण मापक उपकरणों के सटीक अंशांकन में सक्षम होगी, जिससे नियामकों, उद्योगों और स्टार्टअप्स को बड़ा सहारा मिलेगा। वहीं, जर्मनी के पीटीबी के सहयोग से विकसित राष्ट्रीय प्राथमिक सौर सेल अंशांकन सुविधा लेजर-आधारित डिफरेंशियल स्पेक्ट्रल रिस्पॉन्सिविटी प्रणाली से युक्त है, जिसकी अनिश्चितता विश्व में न्यूनतम मानी जाती है। इससे विदेशी प्रमाणन पर निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सीएसआईआर-एनपीएल मानक और मापन के लिए भारत की शीर्ष प्रयोगशाला है।
- भारतीय मानक समय का रखरखाव एनपीएल की परमाणु घड़ियों से होता है।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम सटीक वायु गुणवत्ता मापन पर निर्भर करता है।
- सौर सेल अंशांकन मानक फोटोवोल्टिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।
समग्र रूप से, सीएसआईआर-एनपीएल में स्थापित ये नई सुविधाएं भारत को पर्यावरणीय निगरानी और सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह उपलब्धि न केवल वैज्ञानिक क्षमता को सुदृढ़ करती है, बल्कि सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करती है।