सीएमएस कॉप-15 में 40 नई प्रजातियों को संरक्षण सूची में शामिल

सीएमएस कॉप-15 में 40 नई प्रजातियों को संरक्षण सूची में शामिल

प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज (CMS) के 15वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP15) में 40 नई प्रजातियों को संरक्षित सूची में शामिल किया गया है। यह निर्णय दुनिया भर में घटती प्रवासी प्रजातियों की स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करता है।

माइग्रेटरी स्पीशीज कन्वेंशन (CMS) का परिचय

कन्वेंशन ऑन द कंजर्वेशन ऑफ माइग्रेटरी स्पीशीज ऑफ वाइल्ड एनिमल्स (CMS), जिसे बॉन कन्वेंशन भी कहा जाता है, एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय संधि है। यह संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अंतर्गत कार्य करती है। इस संधि पर 23 जून 1979 को जर्मनी के बॉन शहर में हस्ताक्षर किए गए थे। इसका मुख्य उद्देश्य प्रवासी प्रजातियों और उनके आवासों का संरक्षण करना है।

प्रमुख उद्देश्य और विशेषताएं

CMS एकमात्र वैश्विक अंतर-सरकारी संधि है जो विशेष रूप से प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर केंद्रित है। इसमें स्थलीय, जलीय और पक्षी प्रजातियां शामिल हैं। यह संधि आवास विनाश, जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक शिकार जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है।

संरचना और कार्यप्रणाली

CMS का प्रमुख निर्णय लेने वाला निकाय कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP) है, जो समय-समय पर बैठकों के माध्यम से नीतियां तय करता है। यह संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौतों और गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापनों (MoU) के माध्यम से कार्य करती है। इसमें दो परिशिष्ट (Appendices) होते हैं, जिनमें प्रजातियों को उनके संरक्षण स्तर के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

कॉप-15 के निर्णय का महत्व

कॉप-15 में 40 नई प्रजातियों को शामिल करने का निर्णय यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण को लेकर गंभीरता बढ़ रही है। इससे विभिन्न देशों के बीच समन्वित प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा और प्रवासी प्रजातियों को उनके पूरे प्रवास मार्ग में बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CMS को बॉन कन्वेंशन भी कहा जाता है और यह 1979 में स्थापित हुआ था।
  • Appendix I में अत्यंत संकटग्रस्त प्रजातियां शामिल होती हैं, जिन्हें कड़ी सुरक्षा मिलती है।
  • Appendix II में वे प्रजातियां आती हैं जिनके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
  • CMS संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अंतर्गत कार्य करता है।

अंततः, CMS कॉप-15 का यह निर्णय वैश्विक जैव विविधता संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

Originally written on April 1, 2026 and last modified on April 1, 2026.

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