सीएक्यूएम की बैठक में दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण नियंत्रण पर जोर
दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के तहत प्रवर्तन कार्यबल (ETF) की 128वीं बैठक हाल ही में आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के लिए चल रहे उपायों की समीक्षा की गई और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से सख्त प्रवर्तन रणनीतियों पर जोर दिया गया।
सीएक्यूएम का उद्देश्य और भूमिका
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना वर्ष 2021 में संसद के अधिनियम के तहत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण से संबंधित समस्याओं का समन्वित समाधान करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार लाना है। यह संस्था पर्यावरणीय चुनौतियों का व्यापक दृष्टिकोण से समाधान करने के लिए कार्य करती है।
क्षेत्राधिकार और समन्वित प्रयास
सीएक्यूएम का कार्यक्षेत्र दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों तक फैला हुआ है। यह आयोग विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करता है, वायु गुणवत्ता की निगरानी करता है और मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है। वायु प्रदूषण की सीमाओं से परे फैलने वाली प्रकृति को देखते हुए यह बहु-राज्यीय समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
शक्तियां और प्रवर्तन तंत्र
इस आयोग को व्यापक अधिकार प्राप्त हैं, जिनके तहत यह प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा सकता है, निरीक्षण कर सकता है और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। इसके निर्देश कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं, जिससे इनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सकता है। यह निकाय सीधे संसद के प्रति उत्तरदायी है, जिससे इसकी संस्थागत शक्ति और विश्वसनीयता बढ़ती है।
संरचना और संस्थागत व्यवस्था
सीएक्यूएम की अध्यक्षता सचिव या मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा की जाती है, जिनका कार्यकाल तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक होता है। इसमें दिल्ली और आसपास के राज्यों के प्रतिनिधि, पूर्णकालिक तकनीकी विशेषज्ञ और गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य शामिल होते हैं। इसके अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), इसरो (ISRO) और नीति आयोग जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ भी इसमें योगदान देते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सीएक्यूएम की स्थापना 2021 में संसद के अधिनियम द्वारा की गई थी।
- यह दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करता है।
- इसके निर्देश कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं।
- यह पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के साथ समन्वय करता है।
वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती के बीच सीएक्यूएम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। सशक्त प्रवर्तन और राज्यों के बीच समन्वित प्रयासों के माध्यम से ही इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है, जिससे आने वाले समय में स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।