सिद्धारमैया बने कर्नाटक के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री: सामाजिक न्याय और स्थायित्व की मिसाल
राजनीतिक अस्थिरता, गुटबाज़ी और बार-बार नेतृत्व परिवर्तन से जूझते कर्नाटक के राजनीतिक परिदृश्य में सिद्धारमैया ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु डी. देवराज उर्स को पीछे छोड़ते हुए राज्य के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बनकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वे दो बार (गैर-लगातार कार्यकाल) मुख्यमंत्री रह चुके हैं और कुल मिलाकर सात साल आठ महीने से अधिक समय तक इस पद पर रहे हैं।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से राज्यव्यापी प्रभाव तक की यात्रा
सिद्धारमैया का राजनीतिक सफर विशेष है क्योंकि इसकी शुरुआत किसी राजनीतिक खानदान से नहीं, बल्कि एक किसान परिवार से हुई थी। मैसूरु के पास स्थित सिद्दारमणहुण्डी गांव में जन्मे सिद्धारमैया ने कानून की पढ़ाई की और कुछ समय तक विद्यावर्धक लॉ कॉलेज, मैसूरु में अध्यापन भी किया। 1983 में उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चामुंडेश्वरी सीट से जीत दर्ज कर राजनीति में कदम रखा। पिछले चार दशकों में वे 13 बार चुनाव लड़ चुके हैं और 8 बार विजयी रहे हैं।
कांग्रेस से इतर प्रारंभिक राजनीतिक आधार
सिद्धारमैया की प्रारंभिक राजनीति कांग्रेस के बाहर विकसित हुई। उन्होंने जनता पार्टी और बाद में जनता दल में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं, जैसे कन्नड़ निगरानी समिति के अध्यक्ष और कन्नड़ विकास प्राधिकरण के प्रमुख। मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में वे परिवहन, पशुपालन और रेशम विभाग जैसे मंत्रालयों के प्रभारी रहे। 2006 में जनता दल (सेक्युलर) से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कांग्रेस में शामिल होकर नया राजनीतिक मोड़ लिया।
AHINDA राजनीति और रिकॉर्ड-धारी प्रशासन
कांग्रेस में शामिल होने के बाद सिद्धारमैया ने AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) को एक सशक्त सामाजिक-राजनीतिक गठबंधन के रूप में प्रस्तुत किया। वे इस वर्ग के पहले कुरबा समुदाय से आने वाले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने इस सामाजिक आधार को स्थायी राजनीतिक समर्थन में बदलने का सफल प्रयास किया। वे अब तक 16 राज्य बजट प्रस्तुत कर चुके हैं—जो किसी भी कर्नाटक मुख्यमंत्री द्वारा सर्वाधिक है। सत्ता से बाहर रहते हुए भी उन्होंने विपक्ष के नेता की भूमिका दो बार निभाई।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सिद्धारमैया अब तक के सबसे लंबे कार्यकाल वाले कर्नाटक मुख्यमंत्री हैं।
- डी. देवराज उर्स को कर्नाटक में भूमि सुधार और सामाजिक न्याय की नीति के लिए जाना जाता है।
- AHINDA का अर्थ है अल्पसंख्यक, हिंदू पिछड़ा वर्ग और दलित।
- कर्नाटक की राजनीति में गठबंधन सरकारों और दलबदल की प्रमुख भूमिका रही है।
सामाजिक न्याय और नेतृत्व की निरंतरता
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सिद्धारमैया ने इसे “रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार” बताया। उन्होंने बसवन्ना, नलवाड़ी कृष्णराज वोडेयार और देवराज उर्स जैसी प्रेरणाओं का उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। एक साधारण विधायक बनने की आकांक्षा से शुरू हुई उनकी यात्रा आज कर्नाटक की राजनीति में स्थायित्व और समाज के वंचित वर्गों के सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है।