सालुमरदा तिम्मक्का: पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनीं ‘वृक्ष माता’
कर्नाटक की सुप्रसिद्ध पर्यावरण संरक्षिका सालुमरदा तिम्मक्का के निधन के साथ जमीनी स्तर पर वृक्षारोपण आंदोलन के एक युग का अंत हो गया। उन्होंने अपना पूरा जीवन पेड़ों की सेवा, पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को समर्पित कर दिया। उनकी कहानी केवल वृक्षारोपण की नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति गहरे प्रेम और समर्पण की कहानी है, जिसने पूरे देश को प्रेरित किया।
जीवन और योगदान
तिम्मक्का का जन्म वर्ष 1911 में कर्नाटक के तुमकुर जिले में हुआ था। औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद उन्होंने पर्यावरण की सेवा को अपना जीवन लक्ष्य बना लिया। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर रामनगर जिले के हुलिकल और कुडुर के बीच लगभग 4.5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 385 बरगद के पेड़ लगाए। इन पेड़ों की वर्षों तक उन्होंने अपने बच्चों की तरह देखभाल की। इसी कार्य के कारण उन्हें ‘सालुमरदा’ की उपाधि दी गई, जिसका अर्थ होता है – ‘पेड़ों की कतार’।
राष्ट्रीय सम्मान और पहचान
तिम्मक्का के पर्यावरणीय योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता मिली। उन्हें वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें 1995 में नेशनल सिटिजन अवॉर्ड, 1997 में इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र अवॉर्ड और 2010 में हम्पी विश्वविद्यालय द्वारा नडोजा पुरस्कार से नवाजा गया। उनके कार्य ने न केवल समाज में हरित चेतना को बढ़ाया बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी वृक्षारोपण के महत्व का संदेश दिया।
अंतिम दिन और श्रद्धांजलि
114 वर्ष की आयु में तिम्मक्का का बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरा कर्नाटक शोक में डूब गया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि “तिम्मक्का का जीवन प्रकृति के प्रति अमर प्रेम का प्रतीक है और राज्य ने एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व को खो दिया है।”
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सालुमरदा तिम्मक्का ने 4.5 किमी सड़क के किनारे 385 बरगद के पेड़ लगाए।
- उन्हें वर्ष 2019 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ।
- ‘सालुमरदा’ शब्द का अर्थ है – पेड़ों की कतार।
- उन्हें नडोजा अवॉर्ड, नेशनल सिटिजन अवॉर्ड और वृक्षमित्र अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
तिम्मक्का का जीवन इस बात का प्रमाण है कि समर्पण और प्रेम से कोई भी व्यक्ति समाज में गहरा परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने जो हरियाली की विरासत छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर हमेशा जीवित रहेगी।