सानाए ताकाइची की दोबारा ताजपोशी: जापान की राजनीति में नया शक्ति संतुलन
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची को 8 फरवरी को हुए आकस्मिक निचले सदन चुनावों में निर्णायक जीत के बाद औपचारिक रूप से पुनः प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। 64 वर्षीय ताकाइची, जो अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं, ने अपनी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल कर संसद के शक्तिशाली निचले सदन में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। आर्थिक दबाव और क्षेत्रीय तनाव के दौर में मिला यह जनादेश उनके नेतृत्व को नई मजबूती प्रदान करता है। पुनर्नियुक्ति के तुरंत बाद उन्होंने अपना दूसरा मंत्रिमंडल गठित कर नीतिगत निरंतरता का संकेत दिया।
दो-तिहाई बहुमत का महत्व
465 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में एलडीपी का दो-तिहाई बहुमत सरकार को महत्वपूर्ण विधायी शक्ति देता है। इस सुपरबहुमत के कारण सत्तारूढ़ दल प्रमुख संसदीय समितियों पर प्रभावी नियंत्रण रख सकता है और उच्च सदन द्वारा अस्वीकृत विधेयकों को भी पुनः पारित कर सकता है।
हालांकि उच्च सदन (हाउस ऑफ काउंसिलर्स) में गठबंधन के पास पूर्ण बहुमत नहीं है, फिर भी निचले सदन में यह बढ़त रक्षा, वित्तीय और संवैधानिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
रक्षा विस्तार और संवैधानिक संशोधन
ताकाइची ने पूर्वी एशिया में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर जापान की सैन्य क्षमताओं को सुदृढ़ करने और रक्षा व्यय बढ़ाने का वादा किया है। उन्होंने निरोधात्मक क्षमता (डिटरेंस) को मजबूत करने और हथियार निर्यात में विस्तार का समर्थन किया है।
उनका दीर्घकालिक लक्ष्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी पर्यवेक्षण में तैयार किए गए जापान के शांतिवादी संविधान में संशोधन करना है। विशेष रूप से अनुच्छेद 9, जो युद्ध को संप्रभु अधिकार के रूप में त्यागता है, लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। हालांकि महंगाई, जनसंख्या में गिरावट और सामाजिक कल्याण से जुड़ी घरेलू चुनौतियां संवैधानिक सुधार की गति को प्रभावित कर सकती हैं।
चीन, ताइवान और क्षेत्रीय तनाव
प्रधानमंत्री ने चीन के प्रति कड़ा रुख अपनाया है, विशेषकर ताइवान को लेकर संभावित सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में दिए गए बयानों के कारण। इन टिप्पणियों पर चीन ने कूटनीतिक आपत्ति जताई है।
ताकाइची ने टोक्यो के यासुकुनी श्राइन के दौरे के प्रति भी समर्थन जताया है, जहां जापान के युद्ध में मारे गए सैनिकों और कुछ दोषी युद्धकालीन नेताओं की स्मृति है। यह मुद्दा ऐतिहासिक संवेदनशीलताओं के कारण पड़ोसी देशों के साथ विवाद का कारण बनता रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* जापान में संवैधानिक राजतंत्र और संसदीय शासन प्रणाली लागू है।
* जापान की संसद को नेशनल डाइट कहा जाता है, जिसमें प्रतिनिधि सभा और परामर्शदाता सभा शामिल हैं।
* जापान के संविधान का अनुच्छेद 9 युद्ध का परित्याग करता है।
* यासुकुनी श्राइन में जापान के युद्ध मृतकों के साथ कुछ दोषी युद्धकालीन नेताओं का भी स्मरण किया जाता है।
ताकाइची ने अमेरिका के साथ आर्थिक सुरक्षा और दुर्लभ खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग गहरा करने की इच्छा भी व्यक्त की है। अगले महीने उनकी वाशिंगटन यात्रा प्रस्तावित है। क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच जापान आर्थिक लचीलापन और रणनीतिक साझेदारी के बीच संतुलन साधते हुए वैश्विक व्यापारिक संबंधों को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।