सस्टेनेबल रियल एस्टेट में भारत की वैश्विक उपलब्धि: LEED प्रमाणन में दुनिया में दूसरा स्थान

सस्टेनेबल रियल एस्टेट में भारत की वैश्विक उपलब्धि: LEED प्रमाणन में दुनिया में दूसरा स्थान

सतत निर्माण के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 2025 में अमेरिका के बाहर LEED प्रमाणित भवन क्षेत्रफल में वैश्विक स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया है। अमेरिका ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (USGBC) की रिपोर्ट के अनुसार यह उपलब्धि भारत की पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी निर्माण एवं भवन संचालन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो शहरीकरण और औद्योगिक विकास की तीव्र गति के बावजूद कायम है।

वैश्विक LEED रैंकिंग में भारत की स्थिति

LEED प्रमाणन में अमेरिका अभी भी अग्रणी है, जहाँ 50 मिलियन GSM (ग्रोस स्क्वायर मीटर) से अधिक प्रमाणित क्षेत्र है। अमेरिका के बाहर चीन 26 मिलियन GSM के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि भारत ने 16 मिलियन GSM LEED प्रमाणित क्षेत्र के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। उल्लेखनीय है कि वियतनाम ने भी पहली बार शीर्ष 10 में प्रवेश किया है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में हरित भवन मानकों की स्वीकार्यता बढ़ती दिख रही है।

संचालन और अनुरक्षण आधारित प्रमाणनों की ओर झुकाव

USGBC के अनुसार, भारत में नए निर्माण और इंटीरियर प्रोजेक्ट्स की तुलना में LEED ऑपरेशन्स एंड मेंटेनेंस (O+M) प्रमाणनों में अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह रुझान इस बात का संकेत है कि भारत अब मौजूदा इमारतों के संचालन प्रदर्शन को सुधारने पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है। ऊर्जा दक्षता बढ़ाना, संचालन लागत कम करना और दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभाव को घटाना, अब प्राथमिक उद्देश्य बन चुके हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • LEED का पूर्ण रूप है Leadership in Energy and Environmental Design।
  • LEED को US Green Building Council (USGBC) द्वारा विकसित किया गया है।
  • LEED O+M मौजूदा इमारतों के संचालन और प्रदर्शन सुधार पर केंद्रित है।
  • Green Business Certification Inc. (GBCI) वैश्विक स्तर पर LEED प्रमाणनों का सत्यापन करता है।

हरे भवनों का विस्तार व्यावसायिक कार्यालयों से आगे

भारत में हरित भवनों की अवधारणा अब केवल कॉर्पोरेट ऑफिस तक सीमित नहीं रही। अब औद्योगिक निर्माण इकाइयाँ, वेयरहाउस, होटल, खुदरा परिसर और शैक्षणिक संस्थान भी LEED प्रमाणन की दिशा में अग्रसर हैं। इस विविधीकरण से यह स्पष्ट है कि भारत में टिकाऊ निर्माण एक मुख्यधारा की प्रवृत्ति बनता जा रहा है। यह भारत को वैश्विक हरित रियल एस्टेट बाजार में एक प्रमुख भूमिका दिलाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

भारत की यह प्रगति वैश्विक स्तर पर न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योगदान देती है, बल्कि देश की निर्माण संस्कृति को दीर्घकालिक और सतत विकास के मार्ग पर भी अग्रसर करती है।

Originally written on February 9, 2026 and last modified on February 9, 2026.

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