सरकार ने POCSO कानून में छूट या उम्र घटाने की मांग ठुकराई, 18 वर्ष की सहमति उम्र को बताया ठोस नीति निर्णय
भारत सरकार ने बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत सहमति की उम्र घटाने या “Romeo-Juliet” जैसी छूट देने की किसी भी संभावना को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। लोकसभा में 7 फरवरी को दिए गए एक लिखित उत्तर में सरकार ने कहा कि ऐसा कोई संशोधन बच्चों की सुरक्षा को कमजोर करेगा और शोषण का खतरा बढ़ाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और सरकार की प्रतिक्रिया
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट की दो-जजों की पीठ ने केंद्र से यह विचार करने को कहा था कि क्या किशोरों के आपसी सहमति वाले रिश्तों को POCSO के कठोर प्रावधानों से कुछ हद तक “Romeo-Juliet क्लॉज” के रूप में छूट दी जा सकती है। इसका उद्देश्य सहमति वाले किशोर संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना था।
सरकार ने इसके जवाब में स्पष्ट किया कि POCSO का मूल उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा है और इसमें कोई भी छूट इस मूल भावना को कमजोर करेगी।
सहमति की उम्र 18 वर्ष रखने का तर्क
महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि सहमति की उम्र को 18 वर्ष रखना एक सोच-समझ कर लिया गया नीति निर्णय है। उन्होंने कहा कि यह एकरूपता इसलिए जरूरी है ताकि दबाव, लालच और शोषण को रोका जा सके, क्योंकि नाबालिगों में कानूनी और मानसिक रूप से सूचित सहमति देने की क्षमता नहीं होती।
बाल-संबंधित कानूनों में एकरूपता
मंत्री ने यह भी बताया कि भारत में कई महत्वपूर्ण कानूनों में अधिकार प्राप्त करने की उम्र (Age of Majority) को समान रूप से 18 वर्ष निर्धारित किया गया है, जैसे:
- POCSO अधिनियम, 2012
- बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006
- जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम, 2015
- भारतीय न्याय संहिता, 2023
यह एकरूपता भारत में बाल अधिकारों की रक्षा और कानूनों में संगति बनाए रखने में सहायक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- POCSO अधिनियम, 2012 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के साथ यौन गतिविधि को अपराध माना जाता है।
- भारत में सहमति की उम्र और वयस्कता की कानूनी सीमा दोनों 18 वर्ष निर्धारित हैं।
- “Romeo-Juliet” क्लॉज का मतलब कुछ देशों में किशोरों के बीच उम्र में मामूली अंतर होने पर कानूनी छूट देना होता है।
- POCSO में नाबालिग की सहमति को वैध नहीं माना जाता, जिससे उनका संरक्षण प्राथमिकता पर रहता है।
कानून के दुरुपयोग की आशंका पर सरकार की स्थिति
CPI सांसदों द्वारा उठाए गए कुछ मामलों में POCSO कानून के दुरुपयोग की आशंकाओं पर सरकार ने कहा कि इन चिंताओं को संज्ञान में लिया गया है, लेकिन कानून की मूल भावना बच्चों की सुरक्षा है।
वर्तमान कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का यौन कृत्य सहमति के दावे के बावजूद अपराध की श्रेणी में आता है। यह दृष्टिकोण विशेष रूप से किशोरियों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाया गया है।
इस प्रकार, भारत सरकार का यह रुख स्पष्ट करता है कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा, और कानूनी प्रणाली को एकरूप, कड़ा और बाल हितैषी बनाए रखने की दिशा में प्रतिबद्धता बनी रहेगी।