सबसे तेज़ घूमने वाला बड़ा उल्का पिंड: 2025 MN45 की खोज

सबसे तेज़ घूमने वाला बड़ा उल्का पिंड: 2025 MN45 की खोज

विज्ञान जगत ने हाल ही में हमारे सौरमंडल के बारे में एक अत्यंत रोमांचक और जानकारीपूर्ण अध्याय जोड़ा है। वैज्ञानिकों ने वेरा सी. रुबिन वेधशाला (Vera C. Rubin Observatory) के पहले चित्रों का विश्लेषण करते हुए अब तक के सबसे तेज़ घूमने वाले बड़े उल्का पिंड “2025 MN45” (Asteroid 2025 MN45) की पहचान की है। इस खोज से न केवल उल्का पिंडों की संरचना और व्यवहार के बारे में हमारी समझ में वृद्धि हुई है, बल्कि यह सौरमंडल के प्रारंभिक विकास के रहस्यों को उजागर करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

रिकॉर्ड-ब्रेकिंग घूमने की गति और आकार

उल्का पिंड “2025 MN45” लगभग “710 मीटर” यानी करीब “2,300 फीट” चौड़ा है—जो इसे मानवीय निर्मित अधिकांश गगनचुंबी इमारतों से बड़ा बनाता है। परंतु यह आकार ही इसकी सबसे चौंकाने वाली विशेषता नहीं है। इस बड़े आकार के उल्का पिंड के लिए “113 सेकंड” में एक पूरा चक्र पूरा करना एक रिकॉर्ड है। यह उस आकार श्रेणी में ज्ञात सबसे तेज़ घूमने वाला पिंड है जिसमें व्यास “500 मीटर से अधिक” होता है। इस बेहद तेज़ घूर्णन ने वैज्ञानिकों द्वारा लंबे समय से मानवीय रूप से विकसित संरचनात्मक सीमाओं के बारे में मान्यताओं को चुनौती दी है।

अधिकांश बड़े उल्का पिंडों को “रबड़ पाइल” (रूबर पाइल) कहा जाता है—यानी वे ढीले ढाले पत्थरों और मलबे से बने होते हैं, जिनमें केवल कमजोर गुरुत्वाकर्षण बंधन होता है। परंतु “2025 MN45” की इतनी उच्च घूर्णन दर को बनाए रखने के लिए अत्यधिक आंतरिक मजबूती—कठोर चट्टानी संरचना की आवश्यकता पड़ती है, जिससे पता चलता है कि यह पारंपरिक “रूबर पाइल” नहीं बल्कि सघन पदार्थों से निर्मित हो सकता है।

रुबिन वेधशाला सर्वे और खोज

यह विशिष्ट उल्का पिंड वेरा सी. रुबिन वेधशाला के “LSST कैमरा” (सबसे बड़े डिजिटल कैमरों में से एक) से प्राप्त प्रारंभिक डेटा के उपयोग के दौरान खोजा गया। यह खोज उस विस्तृत सर्वे का हिस्सा है जिसका उद्देश्य छोटे सौरमंडलीय पिंडों के गठन और विकास को और अधिक गहराई से समझना है। इस खोज पर आधारित शोध पत्र “The Astrophysical Journal Letters” में प्रकाशित हुआ, और यह रुबिन वेधशाला के डेटा पर आधारित पहला सहकर्मी-समीक्षित (peer‑reviewed) प्रकाशन भी है।

वैज्ञानिकों ने रुबिन वेधशाला के कमीशनिंग डेटा की मदद से अब तक लगभग “1,900 नए उल्का पिंडों” की पहचान की है। इसी में से कई अन्य अल्ट्रा-तेज़ घूमने वाले पिंड भी शामिल हैं। जैसे ही यह वेधशाला अपने 10‑साल के व्यापक आकाश सर्वे की औपचारिक शुरुआत करेगी, खगोलविदों को उम्मीद है कि ऐसे अधिक तेज़ घूमने वाले और अद्वितीय उल्का पिंडों की खोजें होंगी, जो सौरमंडल के गतिशील इतिहास पर हमारी सोच को और भी विस्तृत करेंगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

• “2025 MN45” हर “113 सेकंड” में एक बार अपनी धुरी पर घूमता है, जो इसे अपने आकार वर्ग में सबसे तेज़ बनाता है।
• इसका व्यास लगभग “710 मीटर” है, जो इसे पृथ्वी पर कई गगनचुंबी इमारतों से बड़ा बनाता है।
• यह मुख्य उल्का बेल्ट में स्थित है—जो मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच का क्षेत्र है।
• यह खोज रुबिन वेधशाला के “LSST कैमरा” डेटा पर आधारित पहली सहकर्मी‑समीक्षित रिपोर्ट का हिस्सा है।

उल्टा पिंड “2025 MN45” न सिर्फ़ विज्ञान के लिए एक नया अध्याय खोलता है, बल्कि यह हमारी समझ को भी चुनौती देता है कि बड़े पिंड कैसे बनते और विकसित होते हैं। जैसे‑जैसे रुबिन वेधशाला और भी डेटा इकट्ठा करेगी, हम सौरमंडल की संरचना और इसके विकास के बारे में और भी गहन अंतर्दृष्टि प्राप्त करेंगे।

Originally written on January 10, 2026 and last modified on January 10, 2026.

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