संस्कार शाला से बच्चों में मूल्यों की मजबूत नींव
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार को गुवाहाटी के लोहिया लायंस ऑडिटोरियम में “संस्कार शाला” नामक मूल्य-आधारित शिक्षा कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह पहल 4 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, नैतिक अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को प्रारंभिक अवस्था में ही विकसित करना है।
समाज की नींव के रूप में मूल्य
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सद्भावना और शुभकामनाएं भारत की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने संस्कृत उक्ति “संस्कारः हि गुणानां मूलम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कार ही सभी गुणों की जड़ होते हैं और व्यक्ति के चरित्र तथा सामाजिक समरसता को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार शिक्षा जहां ज्ञान और कौशल प्रदान करती है, वहीं मूल्य मनुष्य के आचरण को दिशा देते हैं और जिम्मेदार व उदात्त नागरिक गढ़ते हैं।
प्राचीन भारतीय ज्ञान की प्रासंगिकता
तेजी से बदलती और तकनीक-प्रधान दुनिया में मूल्य-आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए राज्यपाल ने भारत की प्राचीन सभ्यतागत परंपराओं का स्मरण किया। उन्होंने वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और भगवद्गीता जैसे ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आज भी सत्य, कर्तव्य और धर्म पर कालातीत मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक युग में प्रगति तभी सार्थक है जब वह नैतिकता, करुणा और अनुशासन के साथ संतुलित हो।
समुदाय की भूमिका और राष्ट्रीय दृष्टि
“संस्कार शाला” को भारत की नैतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक सार्थक प्रयास बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विकास कर रहा है और साथ ही अपने सभ्यतागत मूल्यों की पुनः पुष्टि भी कर रहा है। उन्होंने मारवाड़ी समुदाय की नैतिकता, दान और सामाजिक उत्तरदायित्व की परंपरा की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि अन्य संगठन भी इस प्रकार की पहल आगे बढ़ाएंगे।
दिव्यांग शिक्षा पर राज्यपाल का संदेश
इसी दिन राज्यपाल ने बसीष्ठा स्थित गुवाहाटी ब्लाइंड हाई स्कूल के स्वर्ण जयंती समारोह में भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि किसी समाज की प्रगति का आकलन इस बात से होता है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को कितनी गरिमा और अवसर प्रदान करता है। उन्होंने समावेशी शिक्षा, आधुनिक तकनीक के उपयोग और विद्यालय के पूर्व छात्रों की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि शिक्षा आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का सबसे सशक्त माध्यम है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संस्कार शाला 4 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए मूल्य-आधारित शिक्षा कार्यक्रम है।
- मूल्य शिक्षा औपचारिक पढ़ाई के साथ नैतिक आचरण को विकसित करती है।
- भारतीय शास्त्र सत्य, कर्तव्य और धर्म पर आधारित जीवन दृष्टि प्रस्तुत करते हैं।
- सांस्कृतिक संरक्षण में समुदाय और सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कुल मिलाकर, संस्कार शाला जैसी पहलें यह संदेश देती हैं कि ज्ञान के साथ संस्कारों का संतुलन ही एक सशक्त, संवेदनशील और जिम्मेदार समाज की आधारशिला रख सकता है।