संवाद-2025: जनजातीय ज्ञान और संस्कृति का उत्सव जमशेदपुर में आरंभ

संवाद-2025: जनजातीय ज्ञान और संस्कृति का उत्सव जमशेदपुर में आरंभ

भारत की जनजातीय परंपराओं, ज्ञान और सांस्कृतिक विविधता के सम्मान में आयोजित “संवाद” का 12वां संस्करण झारखंड के जमशेदपुर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आरंभ हुआ। टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा समर्थित यह सम्मेलन देशभर के जनजातीय समुदायों, कलाकारों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षकों को एक मंच पर लाता है, जहाँ सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और समुदाय की एकजुटता का उत्सव मनाया जा रहा है।

पारंपरिक अनुष्ठानों से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत हो, मुंडा, संथाल और उरांव जनजातियों की पारंपरिक प्रार्थनाओं से हुई। समारोह के दौरान भनेर, सकुआ और नगाड़ा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनियों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। हो परंपरा के अनुसार अखड़ा की शुद्धिकरण रस्म का आयोजन किया गया, जो पवित्रता और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर बुजुर्गों को जावा पौधे भेंट किए गए, जिससे प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया गया।

जनजातीय कला और परंपराओं का संगम

इस वर्ष “संवाद” में 18 राज्यों की 30 जनजातियों की 34 पारंपरिक कला शैलियाँ प्रस्तुत की जा रही हैं। गोपाल मैदान में बने 51 प्रदर्शनी केंद्र हस्तशिल्प, लोकनृत्य, पारंपरिक उपचार पद्धतियों और सामुदायिक ज्ञान प्रणालियों का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की जनजातीय विरासत की गहराई और विविधता को प्रदर्शित करना है, जहाँ जीवंत प्रदर्शनों और संवाद सत्रों के माध्यम से सांस्कृतिक अनुभव साझा किए जा रहे हैं।

समुदाय आधारित नेतृत्व का मंच

“संवाद” केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय नेतृत्व और संवाद का प्रतीक है। कलाकार, उपचारक, प्रदर्शनकारी और सामाजिक परिवर्तनकर्ता यहाँ मिलकर पहचान, स्थिरता और सांस्कृतिक निरंतरता जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से यह पहल सामुदायिक सीख और पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान के हस्तांतरण को प्रोत्साहित करती है, जिससे जनजातीय समाज की जड़ों को मजबूती मिलती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • “संवाद” का 12वां संस्करण जमशेदपुर में आयोजित किया जा रहा है।
  • इसमें 18 राज्यों की 30 जनजातियों की 34 कला शैलियाँ प्रदर्शित की जा रही हैं।
  • उद्घाटन अनुष्ठान हो, मुंडा, संथाल और उरांव जनजातियों द्वारा किए गए।
  • यह आयोजन टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा समर्थित है।

सांस्कृतिक दृढ़ता और निरंतरता का संदेश

वक्ताओं ने “संवाद” की भूमिका को पारंपरिक ज्ञान की रक्षा और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। यह आयोजन संवाद, कला और सामुदायिक नेतृत्व के माध्यम से एक ऐसा साझा मंच प्रदान करता है जहाँ जनजातीय अस्मिता का सम्मान होता है और स्थायी, सांस्कृतिक रूप से सशक्त भविष्य की दिशा तय की जाती है। “संवाद” आज भारत की जीवंत जनजातीय आत्मा का प्रतीक बन चुका है जहाँ परंपरा, प्रकृति और पहचान एक साथ गूंजती हैं।

Originally written on November 18, 2025 and last modified on November 18, 2025.

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