व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0: सहकारिता मॉडल से डेयरी क्षेत्र को नई गति
केंद्र सरकार ने “व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0” की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सहकारी ढांचे के माध्यम से डेयरी क्षेत्र का विस्तार, दुग्ध संग्रहण में वृद्धि और महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। सहकारिता मंत्रालय द्वारा घोषित इस पहल का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से दूध खरीद में 50 प्रतिशत की वृद्धि करना है। वर्ष 2028–29 तक प्रतिदिन दुग्ध संग्रहण को 1,007 लाख किलोग्राम तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह कार्यक्रम उन क्षेत्रों में बाजार पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित है, जहां अभी डेयरी सहकारिता का दायरा सीमित है।
दो-स्तरीय विस्तार रणनीति
व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 दो प्रमुख रणनीतियों पर आधारित है—सहकारी कवरेज का विस्तार और मौजूदा डेयरी समितियों की परिचालन क्षमता को मजबूत करना। इसके तहत लगभग 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियां (डीसीएस) उन पंचायतों और गांवों में स्थापित की जाएंगी, जो अब तक इससे वंचित हैं।
साथ ही 46,422 मौजूदा डीसीएस को सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो, बाजार से बेहतर जुड़ाव सुनिश्चित हो और पोषण उपलब्धता में सुधार हो सके। इन समितियों को मौजूदा दूध संग्रहण मार्गों के विस्तार या नए मार्गों के निर्माण के माध्यम से जोड़ा जाएगा।
अवसंरचना और तकनीकी सहयोग
यह पहल डेयरी गतिविधियों को मजबूत करने के लिए आधुनिक अवसंरचना के विकास पर भी जोर देती है। आवश्यकतानुसार ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन यूनिट, डेटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन यूनिट, दूध परीक्षण उपकरण और बल्क मिल्क कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस कार्यक्रम को National Dairy Development Programme 2.0 के तहत वित्तपोषित किया जा रहा है, जिसे पशुपालन एवं डेयरी विभाग संचालित करता है। कार्यान्वयन विभागीय दिशानिर्देशों के अनुरूप किया जाएगा, ताकि सभी राज्यों में समान मानक और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
महिलाओं का सशक्तिकरण और पोषण पर जोर
भारत के डेयरी क्षेत्र में लगभग 70 प्रतिशत कार्यबल महिलाएं हैं, जो दुग्ध उत्पादन, पशु देखभाल और प्रबंधन जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बावजूद इसके, असंगठित संरचना के कारण उनके योगदान को अक्सर उचित मान्यता नहीं मिलती।
व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 का उद्देश्य अधिक से अधिक महिला डेयरी किसानों को सहकारी ढांचे में शामिल कर उनकी आर्थिक भागीदारी को औपचारिक रूप देना है। महिला-नेतृत्व वाली डेयरी सहकारी समितियों को सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के प्रभावी साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही, यह कार्यक्रम पोषण सुरक्षा को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि डेयरी उत्पाद प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 सहकारिता-आधारित डेयरी विस्तार पहल है।
- वर्ष 2028–29 तक प्रतिदिन 1,007 लाख किलोग्राम दूध संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है।
- यह कार्यक्रम राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम 2.0 के तहत वित्तपोषित है।
- भारत के डेयरी कार्यबल में लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
समग्र रूप से, व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और छोटे किसानों को संगठित बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सहकारी मॉडल के माध्यम से यह पहल रोजगार सृजन, किसानों की आय वृद्धि और भारत की वैश्विक डेयरी नेतृत्व की स्थिति को और मजबूत करने का प्रयास करती है।