वैश्विक रियल एस्टेट निवेश में भारत चौथा सबसे पसंदीदा गंतव्य

वैश्विक रियल एस्टेट निवेश में भारत चौथा सबसे पसंदीदा गंतव्य

वैश्विक रियल एस्टेट निवेश के क्षेत्र में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कोलियर्स की ग्लोबल कैपिटल फ्लोज रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भूमि और विकास परियोजनाओं में सीमा-पार निवेश के लिए भारत दुनिया का चौथा सबसे पसंदीदा गंतव्य बन गया है। सितंबर 2025 में जारी इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय रियल एस्टेट निवेश बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को उजागर किया है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास मजबूत बना हुआ है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रियल एस्टेट निवेश की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 की पहली छमाही में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नौ प्रमुख बाजारों में रियल एस्टेट निवेश लगभग 71.9 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। हालांकि यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत कम रहा। इस अध्ययन में ऑस्ट्रेलिया, चीन, हांगकांग, भारत, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ताइवान जैसे प्रमुख बाजारों को शामिल किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक व्यापार अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों के कारण निवेश गतिविधियों में अस्थायी गिरावट देखी गई है। हालांकि ब्याज दरों के स्थिर होने और घरेलू पूंजी के मजबूत होने के बाद वर्ष के दूसरे भाग में निवेश गतिविधियों में सुधार की संभावना जताई गई है।

वैश्विक निवेश प्रवाह में भारत की स्थिति

वर्ष 2025 की पहली छमाही में भारत में लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर का रियल एस्टेट निवेश दर्ज किया गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत कम रहा, फिर भी निवेशकों की रुचि भारत में बनी रही। विदेशी निवेश लगभग 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो कुल संस्थागत निवेश का लगभग 52 प्रतिशत है। वहीं घरेलू निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और यह वर्ष-दर-वर्ष 53 प्रतिशत बढ़कर कुल निवेश का लगभग 48 प्रतिशत हो गया। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में घरेलू निवेशकों की भूमिका भी तेजी से मजबूत हो रही है।

निवेश आकर्षित करने वाले प्रमुख रियल एस्टेट क्षेत्र

भारत में आवासीय और कार्यालय परिसंपत्तियां निवेशकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनी हुई हैं। इन दोनों क्षेत्रों ने मिलकर कुल रियल एस्टेट निवेश का आधे से अधिक हिस्सा प्राप्त किया। केवल आवासीय परियोजनाओं में ही लगभग 0.8 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ। इसके अलावा कई संस्थागत निवेशक स्थानीय डेवलपर्स के साथ साझेदारी करके कार्यालय परिसरों के विकास और अधिग्रहण में रुचि दिखा रहे हैं। यह भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाता है।

मिश्रित उपयोग परियोजनाओं में बढ़ती रुचि

भारत में मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाओं और खुदरा विकास में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025 की पहली छमाही में कुल निवेश का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इन परियोजनाओं में गया, जबकि 2024 की इसी अवधि में यह केवल 7 प्रतिशत था। ऐसे एकीकृत विकास मॉडल, जिनमें आवासीय, खुदरा और मनोरंजन सुविधाएं एक साथ शामिल होती हैं, शहरी क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इसके साथ ही निवेशक डेटा सेंटर, वरिष्ठ नागरिक आवास और जीवन विज्ञान से जुड़े परिसरों जैसे नए रियल एस्टेट क्षेत्रों में भी रुचि दिखा रहे हैं, जो निवेश के विविधीकरण को दर्शाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जापान, चीन, भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।
  • कोलियर्स एक वैश्विक पेशेवर सेवा और निवेश प्रबंधन कंपनी है जो रियल एस्टेट क्षेत्र में विशेषज्ञता रखती है।
  • सीमा-पार पूंजी प्रवाह का अर्थ है एक देश से दूसरे देश में होने वाला अंतरराष्ट्रीय निवेश।
  • रियल एस्टेट निवेश परिसंपत्तियों में आमतौर पर आवासीय, कार्यालय, खुदरा और मिश्रित उपयोग विकास शामिल होते हैं।

भारत का वैश्विक रियल एस्टेट निवेश में चौथे स्थान पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि देश का आर्थिक ढांचा और शहरी विकास तेजी से निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। आने वाले वर्षों में घरेलू और विदेशी दोनों प्रकार के निवेश के साथ भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र और अधिक मजबूत होने की संभावना है।

Originally written on March 9, 2026 and last modified on March 9, 2026.

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