वैश्विक मीथेन स्थिति रिपोर्ट 2025 और 2030 लक्ष्यों की चुनौतियाँ
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन द्वारा जारी नई वैश्विक आकलन रिपोर्ट ने मीथेन उत्सर्जन में कमी की धीमी प्रगति को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई हैं। COP30 के दौरान जारी की गई “ग्लोबल मीथेन स्टेटस रिपोर्ट 2025” बताती है कि हालाँकि कई देशों ने मीथेन नियंत्रण के उपायों को अपनाया है, फिर भी वर्तमान प्रतिबद्धताएँ 2030 के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
बढ़ते उत्सर्जन और 2030 लक्ष्य
2020 में मीथेन उत्सर्जन लगभग 352 मिलियन टन तक पहुँच गया था, और मौजूदा नीतियों के तहत 2030 तक इसके 369 मिलियन टन तक पहुँचने का अनुमान है। कृषि और कचरा प्रबंधन क्षेत्रों से उत्सर्जन में सबसे अधिक वृद्धि होने की संभावना जताई गई है। 2020 के स्तर से कम से कम 30 प्रतिशत मीथेन कटौती का जो वैश्विक लक्ष्य निर्धारित किया गया था, वह वर्तमान रफ्तार से पूरा होता नहीं दिख रहा है।
वैश्विक प्रतिबद्धताएँ और संभावित उपलब्धियाँ
2021 के बाद से कई देशों ने अपनी राष्ट्रीय जलवायु नीतियों में मीथेन-विशिष्ट उपाय शामिल किए हैं। यदि मौजूदा वादों को पूरी तरह लागू किया जाए तो इस दशक में उत्सर्जन 2020 के स्तर से लगभग 8 प्रतिशत नीचे लाया जा सकता है। UNEP का आकलन है कि उपलब्ध तकनीकों और व्यवहार्य उपायों को पूर्ण रूप से अपनाकर उत्सर्जन में 32 प्रतिशत तक की कमी संभव है, जो ग्लोबल मीथेन प्लेज को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मीथेन वर्तमान वैश्विक तापवृद्धि के लगभग एक-तिहाई के लिए जिम्मेदार है।
- 2020 में वैश्विक मीथेन उत्सर्जन लगभग 352 मिलियन टन था।
- कृषि क्षेत्र वैश्विक मीथेन उत्सर्जन में 42 प्रतिशत योगदान देता है।
- ऊर्जा क्षेत्र अकेले ही 2030 तक संभावित कमी का 72 प्रतिशत से अधिक प्रदान कर सकता है।
क्षेत्र-वार उत्सर्जन कम करने की संभावनाएँ
ऊर्जा क्षेत्र को मीथेन कटौती का सबसे प्रभावी और किफायती स्रोत माना गया है। लीक का पता लगाने, फ्लेयरिंग नियंत्रण, बेहतर वितरण नेटवर्क और जीवाश्म ईंधन संचालन से मीथेन कैप्चर जैसी तकनीकों से उत्सर्जन तेजी से घटाया जा सकता है। कचरा प्रबंधन क्षेत्र में लैंडफिल गैस कैप्चर और जैविक कचरे को अलग करके निपटान जैसे उपाय लंबी अवधि में बेहतर परिणाम देते हैं। कृषि क्षेत्र में सुधार सबसे कठिन माना जाता है, क्योंकि पशु आहार एडिटिव्स, नस्ल सुधार, और धान की खेती में बेहतर जल प्रबंधन जैसी तकनीकों को अपनाने में समय और व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
बेहतर डेटा और वित्त की आवश्यकता
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मीथेन मापन प्रणाली अभी भी कई देशों में असमान और अधूरी है, विशेषकर जीवाश्म ईंधन क्षेत्र में। सटीक निगरानी और पारदर्शी डेटा नीति-निर्माताओं को लक्षित हस्तक्षेप तय करने में मदद कर सकते हैं। वर्तमान में मीथेन कटौती के लिए आवंटित वित्त आवश्यकताओं से काफी कम है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर उत्सर्जन कमी कार्यक्रमों का कार्यान्वयन बाधित होता है।