वैश्विक निराशा के बीच भारत में बढ़ा सकारात्मक जनमत
दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के माहौल के बीच भारत एक अलग उदाहरण बनकर उभरा है। Ipsos द्वारा जारी “What Worries the World” सर्वे (मार्च 2026) के अनुसार, जहां अधिकांश देशों में लोग अपने भविष्य को लेकर निराश हैं, वहीं भारत में बहुसंख्यक नागरिक देश की दिशा को लेकर आश्वस्त दिखाई देते हैं।
वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति
यह सर्वे 29 देशों में किया गया, जिसमें 25 देशों के नागरिकों ने माना कि उनका देश गलत दिशा में जा रहा है। इसके विपरीत, भारत में 65% लोगों का मानना है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो वैश्विक औसत 39% से काफी अधिक है। भारत इस सूची में सिंगापुर और मलेशिया के साथ शीर्ष तीन सबसे आशावादी देशों में शामिल है, जबकि कई विकसित देशों में यह आंकड़ा काफी कम है।
आर्थिक विश्वास और चुनौतियां
भारत में 74% लोगों ने मौजूदा आर्थिक स्थिति को अच्छा बताया है, जिसे वित्त वर्ष 2025–26 के लिए लगभग 7.4% की मजबूत विकास दर का समर्थन प्राप्त है। आर्थिक अपेक्षा सूचकांक भी भविष्य के प्रति सकारात्मक संकेत देता है। हालांकि, इसके साथ ही व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक दबाव भी मौजूद है। लोगों के निजी वित्तीय हालात में गिरावट यह दर्शाती है कि महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों का असर अभी भी बना हुआ है।
नागरिकों की प्रमुख चिंताएं
सकारात्मक दृष्टिकोण के बावजूद कई गंभीर मुद्दे लोगों की चिंता का कारण बने हुए हैं। महंगाई सबसे बड़ी चिंता है, जिसे 47% लोगों ने प्रमुख समस्या बताया। इसके बाद बेरोजगारी (40%) का स्थान है। इसके अलावा शिक्षा, अपराध, भ्रष्टाचार, कर व्यवस्था, आतंकवाद, असमानता और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। यह दर्शाता है कि देश में विकास के साथ-साथ कई संरचनात्मक चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
वैश्विक संकटों के बीच भारत की मजबूती
भारत की यह सकारात्मक स्थिति उसके मजबूत आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण का परिणाम है। पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा संकट के बावजूद भारत ने कच्चे तेल के आयात में विविधता और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के जरिए संतुलन बनाए रखा है। साथ ही, संतुलित विदेश नीति और प्रभावी घरेलू नीतियों ने भी जनमत को सकारात्मक बनाए रखने में योगदान दिया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- “What Worries the World” एक मासिक वैश्विक सर्वे है, जिसे Ipsos द्वारा संचालित किया जाता है।
- भारत दुनिया के सबसे आशावादी तीन देशों में शामिल है।
- 2026 में भारत में महंगाई सबसे बड़ी चिंता के रूप में सामने आई है।
- यह सर्वे मुख्यतः शहरी और सामाजिक-आर्थिक वर्ग A, B और C पर आधारित है।
भारत का यह सकारात्मक जनमत वैश्विक परिदृश्य में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, महंगाई और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक होगा, ताकि यह विश्वास लंबे समय तक कायम रह सके।