वैश्विक कार्बन बजट 2025 रिपोर्ट: उत्सर्जन में रिकॉर्ड वृद्धि, जलवायु लक्ष्यों पर गंभीर खतरा
नवीनतम ग्लोबल कार्बन बजट आकलन (Global Carbon Budget 2025) के अनुसार, दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन 2025 में अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँचने वाला है। यह रिपोर्ट COP30 सम्मेलन (बेलेम, ब्राज़ील) में जारी की गई, जिसमें बताया गया कि जीवाश्म ईंधन आधारित उत्सर्जन लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे पेरिस समझौते के तहत दिए गए वादों और वास्तविक प्रगति के बीच अंतर और चौड़ा होता जा रहा है।
रिकॉर्ड स्तर पर जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन 38.1 अरब टन तक पहुँचने की संभावना है, जो 2024 की तुलना में 1.1% की वृद्धि दर्शाता है। इससे वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 2015 के स्तर से लगभग 10% अधिक हो गया है।वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा दर पर यदि उत्सर्जन जारी रहा, तो 1.5°C तापमान वृद्धि सीमा को बनाए रखने के लिए शेष कार्बन बजट चार वर्षों में समाप्त हो जाएगा। इसका अर्थ यह है कि 2029 तक वैश्विक जलवायु संतुलन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
भारत में उत्सर्जन वृद्धि दर में कमी
भारत का कुल उत्सर्जन 2025 में अनुमानतः 3.23 अरब टन रहने की उम्मीद है। यद्यपि यह अभी भी बढ़ रहा है, लेकिन वृद्धि दर घटकर 1.4% तक सीमित हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सौर ऊर्जा उत्पादन के विस्तार और समय से पहले आए मानसून के कारण ठंडा करने (कूलिंग) की ऊर्जा आवश्यकता कम हुई है।भारत में कोयला खपत की वृद्धि दर में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो चीन में देखे गए रुझान के समान है। इससे संकेत मिलता है कि भारत धीरे-धीरे नवीकरणीय ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
प्रमुख उत्सर्जक देशों की स्थिति
चीन अब भी दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक है, जिसका उत्सर्जन 2025 में 12.3 अरब टन अनुमानित है। इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका का स्थान है, जहाँ उत्सर्जन 5 अरब टन तक पहुँच सकता है। यह वर्ष अमेरिका के लिए उल्लेखनीय है क्योंकि वहाँ उत्सर्जन में 1.9% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्षों में यह दर स्थिर या नकारात्मक रही थी।भारत तीसरे स्थान पर है, लेकिन प्रति व्यक्ति उत्सर्जन (per capita emissions) के लिहाज से अब भी विकसित देशों की तुलना में काफी कम है।
बढ़ती वैज्ञानिक चिंता और जलवायु सीमाओं पर खतरा
विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि जीवाश्म ईंधन की खपत में तुरंत और बड़े पैमाने पर कमी नहीं की गई, तो 1.5°C तापमान लक्ष्य को पाना लगभग असंभव हो जाएगा।रिपोर्ट यह भी बताती है कि 35 से अधिक देशों ने अपने उत्सर्जन घटाते हुए भी आर्थिक विकास हासिल किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विकास और उत्सर्जन को अलग (decouple) किया जा सकता है। हालांकि, यदि वैश्विक स्तर पर तेल और गैस पर निर्भरता शीघ्र नहीं घटाई गई, तो जलवायु जोखिम नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वैश्विक जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन 2025 में 38.1 अरब टन तक पहुँचने की संभावना।
- 1.5°C तापमान सीमा का कार्बन बजट 2029 तक समाप्त हो सकता है।
- भारत के उत्सर्जन में 1.4% वृद्धि की संभावना, कुल 3.23 अरब टन।
- तेल और गैस से मिलकर वैश्विक उत्सर्जन का 55% हिस्सा बनता है।
ग्लोबल कार्बन बजट की यह चेतावनी दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन पर मौजूदा प्रयास अपर्याप्त हैं। यदि विश्व समुदाय जल्द ठोस कदम नहीं उठाता, तो अगले दशक में पृथ्वी का तापमान और मौसमीय संतुलन दोनों ही खतरनाक स्तर पर पहुँच सकते हैं।