वेस्ट बैंक पर संयुक्त राष्ट्र बयान में भारत की भागीदारी और कूटनीतिक संतुलन

वेस्ट बैंक पर संयुक्त राष्ट्र बयान में भारत की भागीदारी और कूटनीतिक संतुलन

भारत ने 100 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संयुक्त राष्ट्र के एक संयुक्त बयान का समर्थन किया है, जिसमें वेस्ट बैंक में इज़राइल की कार्रवाइयों की आलोचना की गई है। बयान में क्षेत्र पर नियंत्रण मजबूत करने के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया और कहा गया कि इससे शांति एवं स्थिरता की संभावनाएं कमजोर होती हैं। भारत ने इस बयान का समर्थन समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले किया। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित इज़राइल यात्रा से पहले उठाया गया है, जहां वे इज़राइली संसद को संबोधित कर सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र के संयुक्त बयान की मुख्य बातें

संयुक्त बयान में वेस्ट बैंक में इज़राइल की एकतरफा नीतिगत निर्णयों की कड़ी निंदा की गई। इसमें कहा गया कि क्षेत्र में अवैध उपस्थिति के विस्तार की कोशिशें अंतरराष्ट्रीय कानून और इज़राइल की प्रतिबद्धताओं के विपरीत हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने किसी भी प्रकार के विलय (एनेक्सेशन) का विरोध दोहराया और 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों, जिनमें पूर्वी येरुशलम भी शामिल है, की जनसांख्यिकीय संरचना या दर्जे में बदलाव के प्रयासों को अस्वीकार किया।

यह बयान बहुपक्षीय मंचों पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता को दर्शाता है, जहां क्षेत्र की अंतिम स्थिति से जुड़े मुद्दों पर व्यापक बहस जारी है।

कूटनीतिक समय और रणनीतिक संतुलन

भारत का यह कदम उसके पारंपरिक दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन और इज़राइल के साथ मजबूत रणनीतिक संबंधों के बीच संतुलन को दर्शाता है। हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में इज़राइल के साथ सहयोग बढ़ाया है। साथ ही, वह फिलिस्तीन और पश्चिम एशिया के अन्य देशों के साथ भी संवाद बनाए हुए है।

प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय यात्रा से ठीक पहले यह समर्थन कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून और संवाद-आधारित समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए व्यावहारिक कूटनीति अपनाता है।

वेस्ट बैंक विवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून

वेस्ट बैंक दशकों से इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष का केंद्र रहा है। 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद से यह क्षेत्र इज़राइली कब्जे में है। बस्तियों के विस्तार, संप्रभुता और सीमाओं के प्रश्न संयुक्त राष्ट्र महासभा और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार चर्चा का विषय बने रहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थायी जनसांख्यिकीय बदलाव या एकतरफा विलय को व्यापक स्वीकृति नहीं मिली है। इसी संदर्भ में संयुक्त बयान ने स्थिति को लेकर वैश्विक चिंता को रेखांकित किया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* वेस्ट बैंक 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद से इज़राइली नियंत्रण में है।
* पूर्वी येरुशलम को इज़राइल और फिलिस्तीन दोनों अपनी राजधानी के रूप में दावा करते हैं।
* संयुक्त राष्ट्र महासभा इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर अक्सर गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करती है।
* भारत लंबे समय से शांतिपूर्ण वार्ता और संवाद पर आधारित दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता रहा है।

भारत की इस पहल से स्पष्ट है कि वह पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच संतुलित और सिद्धांत-आधारित कूटनीति को प्राथमिकता देता है। अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और वार्ता-आधारित समाधान पर जोर देते हुए भारत क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता की दिशा में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है।

Originally written on February 19, 2026 and last modified on February 19, 2026.

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