विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर संविधान की प्रस्तावना पाठ से मूल्यों की पुनर्पुष्टि
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, 20 फरवरी 2026 को विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगा। यह आयोजन नई दिल्ली के द्वारका स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारत के संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन होगा, जिसका नेतृत्व राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा करेंगे।
प्रस्तावना का सामूहिक पाठ न्याय—सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक—के साथ-साथ स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्शों के प्रति पुनः प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा। यह पहल संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विश्व सामाजिक न्याय दिवस का महत्व
विश्व सामाजिक न्याय दिवस प्रत्येक वर्ष 20 फरवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना, भेदभाव को समाप्त करना और असमानताओं को कम करने के लिए वैश्विक संकल्प को रेखांकित करना है।
यह दिवस विशेष रूप से हाशिए पर स्थित और वंचित समुदायों के लिए अवसरों की समान उपलब्धता पर बल देता है। भारत का संवैधानिक ढांचा भी राज्य को सभी नागरिकों के लिए न्याय और समानता सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपता है, जिससे यह दिवस राष्ट्रीय मूल्यों के अनुरूप बनता है।
संवैधानिक मूल्यों पर विशेष जोर
कार्यक्रम में प्रस्तावना का पाठ युवाओं और विभिन्न हितधारकों के बीच संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। यह सरकार के सामाजिक सशक्तिकरण और प्रत्येक नागरिक की गरिमा सुनिश्चित करने के सतत प्रयासों का प्रतिबिंब है।
कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र भाग लेंगे। उनकी सहभागिता संवैधानिक शासन और सामाजिक न्याय के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सामाजिक सशक्तिकरण में संस्थाओं की भूमिका
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग, वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगजन के लिए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग से समानता, अधिकार और विधिक साक्षरता से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता और शोध को बढ़ावा मिलता है।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत किया गया था, जिसका उद्देश्य जरूरतमंदों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व सामाजिक न्याय दिवस प्रतिवर्ष 20 फरवरी को मनाया जाता है।
- भारतीय संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्श निहित हैं।
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय कमजोर वर्गों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित करता है।
- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की स्थापना विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत की गई थी।
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में इस आयोजन के माध्यम से युवाओं और भावी विधि पेशेवरों को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल समावेशी और न्यायपूर्ण समाज की संवैधानिक परिकल्पना को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।