विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025: प्रदूषण संकट की गंभीर तस्वीर
विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रदूषण संकट को उजागर करते हुए पाकिस्तान को सबसे अधिक प्रदूषित देश घोषित किया है। इसके बाद बांग्लादेश और ताजिकिस्तान का स्थान है, जबकि भारत छठे स्थान पर है। स्विट्जरलैंड स्थित संस्था IQAir द्वारा जारी इस रिपोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि वायु प्रदूषण अब एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, जिसका असर करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ रहा है।
वैश्विक रैंकिंग और रुझान
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के पांच सबसे प्रदूषित देशों में पाकिस्तान, बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, चाड और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य शामिल हैं। भारत छठे स्थान पर है, जो यह दर्शाता है कि विभिन्न सरकारी प्रयासों के बावजूद देश में वायु गुणवत्ता अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। इसके विपरीत, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों की रैंकिंग काफी नीचे है, जो बेहतर पर्यावरणीय नीतियों और नियंत्रण उपायों को दर्शाती है।
डेटा संग्रह और पद्धति
यह रिपोर्ट 143 देशों और क्षेत्रों के 9,446 शहरों में स्थित 40,000 से अधिक मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों पर आधारित है। इन आंकड़ों में सरकारी स्टेशन, शैक्षणिक संस्थान, निजी सेंसर और नागरिकों द्वारा संचालित निगरानी प्रणाली शामिल हैं। अध्ययन का मुख्य आधार PM2.5 स्तर है, जो अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं और मानव शरीर में गहराई तक प्रवेश कर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न करते हैं।
शहर स्तर पर स्थिति और भारत
शहरों के स्तर पर उत्तर प्रदेश का लोनी विश्व का सबसे प्रदूषित शहर पाया गया है। इसके बाद चीन का होतान और मेघालय का बर्नीहाट आते हैं। दिल्ली चौथे स्थान पर है, जो लगातार वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। उल्लेखनीय है कि दुनिया के 25 सबसे प्रदूषित शहरों में से अधिकांश भारत, पाकिस्तान और चीन में स्थित हैं, जिनमें भारत के कई शहर शीर्ष स्थानों पर हैं।
स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, विश्व के 91 प्रतिशत देश विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित PM2.5 मानकों से अधिक प्रदूषण स्तर का सामना कर रहे हैं। केवल लगभग 9 प्रतिशत देश ही सुरक्षित मानकों को पूरा कर पा रहे हैं। बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां, जंगलों में आग और शहरीकरण वायु गुणवत्ता को और खराब कर रहे हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है, क्योंकि विकास के दौरान प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से उनके फेफड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PM2.5 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे कण होते हैं, जो फेफड़ों और रक्त में प्रवेश कर सकते हैं।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वायु गुणवत्ता के लिए सुरक्षित सीमा निर्धारित करता है।
- IQAir स्विट्जरलैंड आधारित वायु गुणवत्ता निगरानी संस्था है।
- केवल लगभग 9 प्रतिशत देश ही WHO के सुरक्षित वायु मानकों को पूरा करते हैं।
अंततः, यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि वायु प्रदूषण अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस नीतियों, जागरूकता और सतत विकास की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।