विश्व मधुमेह दिवस: हृदय रोग के बढ़ते खतरे पर वैश्विक चेतावनी
हर वर्ष 14 नवम्बर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मधुमेह के बढ़ते मामलों और उसके दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विश्वभर में करोड़ों लोग या तो मधुमेह से पीड़ित हैं या उन्हें इसका पता तक नहीं है। विशेषज्ञ लगातार यह चेतावनी देते आ रहे हैं कि यह रोग केवल रक्त शर्करा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के कई अंगों, विशेष रूप से हृदय, पर गहरा प्रभाव डालता है।
सभी आयु वर्गों में बढ़ता मधुमेह का बोझ
मधुमेह तब होता है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बनाता या उसका प्रभावी उपयोग नहीं कर पाता। इससे रक्त में शर्करा का स्तर लगातार बढ़ा रहता है। हालिया आकलनों के अनुसार, विश्व के वयस्कों में से हर दस में से एक व्यक्ति मधुमेह से ग्रस्त है, और आने वाले दशकों में यह संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है। चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में लोग अपनी स्थिति से अनजान हैं, जिससे गंभीर जटिलताओं की संभावना और बढ़ जाती है।
उच्च रक्त शर्करा का शरीर पर प्रभाव
लंबे समय तक बढ़ी हुई रक्त शर्करा (हाइपरग्लाइसीमिया) आंखों, नसों, गुर्दों और हृदय को प्रभावित करती है। इसके गंभीर रूप में यह गुर्दा विफलता, तंत्रिका क्षति, स्ट्रोक और दृष्टि हानि जैसी स्थितियों का कारण बन सकती है। ये प्रभाव धीरे-धीरे विकसित होते हैं और अक्सर तब तक पता नहीं चलते जब तक शरीर को पर्याप्त नुकसान न हो जाए। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और शुगर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।
मधुमेह और हृदय रोग के बीच संबंध
उच्च रक्त शर्करा रक्त वाहिकाओं की आंतरिक दीवारों को क्षतिग्रस्त करती है और उन नसों को भी प्रभावित करती है जो हृदय की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करती हैं। इससे धमनियों में सूजन, संकुचन और कठोरता बढ़ जाती है, जिससे रक्त प्रवाह सीमित हो जाता है और हृदयाघात (हार्ट अटैक) की संभावना बढ़ती है। साथ ही, ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति में कमी से हृदय की कार्यक्षमता भी घट जाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व मधुमेह दिवस हर वर्ष 14 नवम्बर को मनाया जाता है।
- लगातार उच्च रक्त शर्करा रक्त वाहिकाओं और हृदय नियंत्रक नसों को क्षति पहुंचाती है।
- मधुमेह रोगियों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर का खतरा अधिक होता है।
- एथेरोस्क्लेरोसिस और क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन हृदय रोग और मधुमेह को जोड़ने वाले प्रमुख कारण हैं।
हृदय जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारक
मधुमेह से ग्रस्त व्यक्तियों में कोलेस्ट्रॉल असंतुलन के कारण धमनियों में प्लाक (plaque) बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। उच्च एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड स्तर धमनियों के अवरोध को तेज़ करते हैं। इंसुलिन प्रतिरोध हृदय की ऊर्जा चयापचय को प्रभावित करता है, जिससे कार्डियोमायोपैथी विकसित होती है। इसके अलावा, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन रक्त वाहिकाओं की संरचना को नुकसान पहुँचाते हैं, जबकि स्वायत्त तंत्रिका क्षति (autonomic neuropathy) दिल की धड़कन की गति को अस्थिर कर देती है, जिससे अतालता (arrhythmia) और अन्य हृदय आपात स्थितियों का जोखिम बढ़ जाता है।