विश्व ब्रेल दिवस: दृष्टिबाधित व्यक्तियों की समानता और सशक्तिकरण का प्रतीक
विश्व ब्रेल दिवस हर वर्ष 4 जनवरी को मनाया जाता है, ताकि ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल की जयंती को सम्मानित किया जा सके। यह दिन दृष्टिबाधित व्यक्तियों की पहुंच, स्वतंत्रता और समान भागीदारी के महत्व को रेखांकित करता है, जो समावेशी समाज की दिशा में एक आवश्यक कदम है।
ब्रेल का उद्गम और महत्व
ब्रेल एक स्पर्श आधारित पठन-पाठन प्रणाली है, जो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को अपनी उंगलियों से छह उभरे बिंदुओं के पैटर्न के माध्यम से पढ़ने और लिखने में सक्षम बनाती है। इसका आविष्कार 1824 में फ्रांस में जन्मे लुई ब्रेल (4 जनवरी 1809) द्वारा किया गया था।
पिछले दो सौ वर्षों में, ब्रेल एक वैश्विक कोड के रूप में विकसित हुआ है, जिसे कई भाषाओं में अपनाया गया है। यह प्रणाली पुस्तकें पढ़ने, नोट्स लिखने, गणित, विज्ञान और संगीत सीखने जैसी दैनिक गतिविधियों को संभव बनाती है।
शिक्षा और सामाजिक समावेशन में भूमिका
ब्रेल लिपि दृष्टिबाधित व्यक्तियों को शिक्षा और सूचना तक पहुँच प्रदान कर उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने में सक्षम बनाती है। इससे न केवल साक्षरता को बढ़ावा मिलता है, बल्कि रोजगार के अवसर और सामाजिक सहभागिता भी सुनिश्चित होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सहायक तकनीकों के विकास के बावजूद, ब्रेल लिपि आज भी साक्षरता और बौद्धिक स्वतंत्रता के लिए अविनाशी माध्यम है।
भारत में आयोजन और जागरूकता
नई दिल्ली में नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड द्वारा विश्व ब्रेल दिवस पर एक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर “More Braille, More Empowerment” नामक एक संयुक्त जागरूकता अभियान भी शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य ब्रेल साक्षरता को बढ़ावा देना और दृष्टिबाधित व्यक्तियों के सम्मान और समानता की वकालत करना है।
महासचिव एस.के. रुंगटा ने कहा कि ब्रेल, आविष्कार के दो शताब्दियों बाद भी, दृष्टिबाधित व्यक्तियों के सामाजिक समावेशन का मूल आधार बना हुआ है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व ब्रेल दिवस प्रत्येक वर्ष 4 जनवरी को मनाया जाता है।
- ब्रेल लिपि का आविष्कार 1824 में लुई ब्रेल द्वारा किया गया था।
- यह लिपि 6 उभरे बिंदुओं के पैटर्न पर आधारित होती है।
- यह दिवस दृष्टिबाधित समुदाय की पहुंच और समावेशन को उजागर करता है।
पहुंच, समानता और विधिक परिप्रेक्ष्य
इस अवसर पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि ब्रेल प्रणाली दृष्टिबाधित व्यक्तियों को शिक्षा, न्याय, समाज में पूर्ण भागीदारी और समानता सुनिश्चित करती है।
विश्व ब्रेल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि समावेशी संवाद प्रणाली मानव अधिकारों को बनाए रखने और स्वतंत्र और गरिमापूर्ण जीवन की कुंजी है।
यह दिवस न केवल ब्रेल लिपि के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि एक संवेदनशील और समावेशी समाज की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।