विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट: बदलते रुझान और नीतिगत संकेत

विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट: बदलते रुझान और नीतिगत संकेत

पिछले तीन वर्षों में उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। संसद में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच यह संख्या लगातार कम हुई है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा साझा किए गए ये आंकड़े आव्रजन ब्यूरो के अभिलेखों पर आधारित हैं और यह संकेत देते हैं कि छात्रों की प्राथमिकताओं, आर्थिक परिस्थितियों और भारत की उच्च शिक्षा नीतियों में बदलाव का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में तेज गिरावट

वर्ष 2023 में 9.08 लाख से अधिक भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए थे। यह संख्या 2024 में घटकर 7.7 लाख रह गई और 2025 में और गिरकर 6.26 लाख तक पहुंच गई। दो वर्षों में लगभग 2.82 लाख छात्रों की कमी आई, जो लगभग 31 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है।

ये आंकड़े राज्यसभा में पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रस्तुत किए गए थे। लगातार गिरावट यह संकेत देती है कि विदेश में पढ़ाई को लेकर छात्रों के निर्णय में कई नए कारक प्रभावी हो रहे हैं।

विदेश में अध्ययन के निर्णय को प्रभावित करने वाले कारक

सरकार के अनुसार विदेश में पढ़ाई करना व्यक्तिगत निर्णय है, जो वहन क्षमता, शिक्षा ऋण की उपलब्धता, विदेशी समाजों के अनुभव और विशेष पाठ्यक्रमों की उपयुक्तता जैसे कारकों पर निर्भर करता है।

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कुछ देशों में सख्त वीजा नियम, बढ़ती ट्यूशन फीस और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव भी इस गिरावट के संभावित कारण हो सकते हैं। ज्ञान-आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप के कारण छात्र अब घरेलू अवसरों को भी गंभीरता से देख रहे हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और घरेलू सुधार

National Education Policy 2020 के अंतर्गत सरकार ने उच्च शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक सुधार शुरू किए हैं। इनमें बुनियादी ढांचे का उन्नयन, मान्यता प्रणाली में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा और डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म का विस्तार शामिल है।

विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने की अनुमति दी गई है। अब तक 14 विदेशी संस्थानों को भारत में कैंपस स्थापित करने की मंजूरी मिली है, जबकि गुजरात के GIFT City को वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पांच विदेशी विश्वविद्यालयों को संचालन की स्वीकृति दी गई है। इन पहलों का उद्देश्य देश में ही वैश्विक स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि छात्रों को विदेश जाने की आवश्यकता कम हो।

भारतीय प्रवासी और विकास दृष्टिकोण

सरकार का मानना है कि सफल और समृद्ध प्रवासी भारतीय देश के लिए मूल्यवान संपत्ति हैं। उनके ज्ञान, कौशल और वैश्विक नेटवर्क का उपयोग राष्ट्रीय विकास के लिए किया जा सकता है। अनुसंधान सहयोग, निवेश संबंध और तकनीकी साझेदारी इस रणनीति के प्रमुख घटक हैं।

विदेश में बसे भारतीय पेशेवरों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना और उनकी विशेषज्ञता का लाभ उठाना सरकार की दीर्घकालिक विकास नीति का हिस्सा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विदेश जाने वाले छात्रों का डेटा आव्रजन ब्यूरो द्वारा संकलित किया जाता है, जो गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर देती है।
  • विदेशी विश्वविद्यालयों को अब भारत में परिसर स्थापित करने की अनुमति है।
  • गिफ्ट सिटी, गुजरात को वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों के लिए विशेष केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

समग्र रूप से, विदेश में अध्ययन के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की घटती संख्या केवल आर्थिक कारणों का परिणाम नहीं, बल्कि घरेलू शिक्षा प्रणाली में हो रहे सुधारों और बदलते वैश्विक परिदृश्य का भी संकेत है। यदि इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भारत वैश्विक गुणवत्ता वाली शिक्षा का केंद्र बन सकता है और प्रतिभा का पलायन कम हो सकता है।

Originally written on February 12, 2026 and last modified on February 12, 2026.

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