विदेशी गारंटी लेनदेन पर आरबीआई की नई गाइडलाइंस: 2026 विनियमों की प्रमुख बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में “विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गारंटी) विनियम, 2026” जारी किए हैं, जो भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों से जुड़ी गारंटी लेनदेन पर एक समग्र नियामक ढांचा प्रस्तुत करते हैं। यह कदम अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और नियामक निगरानी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
RBI द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार, सभी प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक इन नए विनियमों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे, जब वे अनिवासी व्यक्तियों से संबंधित गारंटी लेनदेन को प्रबंधित करेंगे। यह फ्रेमवर्क उन सभी गारंटियों पर लागू होगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंधन व्यवस्था के अंतर्गत जारी, संशोधित या आमंत्रित की जाती हैं।
इसके अतिरिक्त, बैंक को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे नियामक विभाग द्वारा जारी अतिरिक्त दिशानिर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करें। यह पहल विदेशी मुद्रा प्रणाली में समरूपता लाने और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में भारतीय संस्थानों की सहभागिता को सहज बनाने हेतु की गई है।
नए विनियमों के अंतर्गत सभी गारंटी से जुड़े लेनदेन की रिपोर्टिंग अब अनिवार्य कर दी गई है। प्राधिकृत डीलर बैंक को इन लेनदेन की रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में देनी होगी, जिसकी विस्तृत जानकारी बाद में आरबीआई द्वारा साझा की जाएगी।
RBI ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्टिंग समय पर और सटीक होनी चाहिए। इसके अलावा, बैंकों को अपने ग्राहकों को इन नए नियामक दायित्वों के बारे में सूचित करना अनिवार्य किया गया है। यह कदम लेनदेन की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नियामक जोखिम को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
“विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गारंटी) विनियम, 2026” के लागू होने के साथ ही RBI ने कई पुराने A.P. (DIR Series) परिपत्रों को निरस्त कर दिया है, जिनकी सूची परिपत्र के परिशिष्ट में दी गई है। इसके अतिरिक्त, व्यापार ऋण (Trade Credit) से जुड़ी गारंटी पर त्रैमासिक रिपोर्टिंग की आवश्यकता अब समाप्त कर दी गई है, जो मार्च 2026 से प्रभावी होगी।
इस बदलाव से बैंकों का अनुपालन बोझ कम होगा, जबकि नियामकीय स्पष्टता बनी रहेगी। यह संतुलन वित्तीय संस्थानों को बेहतर संचालन की सुविधा देगा।
नए विनियमों के अनुरूप RBI ने अपनी विभिन्न मास्टर डायरेक्शंस में भी आवश्यक संशोधन किए हैं। इसमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:
- बाह्य वाणिज्यिक उधारी (External Commercial Borrowings)
- व्यापार ऋण (Trade Credits)
- वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात और आयात (Export and Import)
- विदेशी मुद्रा अधिनियम के अंतर्गत रिपोर्टिंग दायित्व
इन संशोधनों का उद्देश्य नीति के विभिन्न पहलुओं में संगति और स्पष्टता बनाए रखना है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार का व्यवस्थित विकास संभव हो सके।
- “विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गारंटी) विनियम, 2026” RBI द्वारा जनवरी 2026 में जारी किए गए।
- यह विनियम भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों से संबंधित सभी गारंटी लेनदेन को कवर करता है।
- व्यापार ऋण पर त्रैमासिक रिपोर्टिंग की अनिवार्यता मार्च 2026 से समाप्त कर दी गई है।
- ये विनियम विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) के अंतर्गत लागू किए गए हैं।
RBI की यह पहल भारत के विदेशी मुद्रा क्षेत्र में एक संगठित और पारदर्शी संरचना की ओर एक सशक्त कदम है, जिससे न केवल वित्तीय संस्थाओं का संचालन बेहतर होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में भी विश्वास बढ़ेगा।